उत्तर प्रदेशचित्रकूट

गौशाला या मौत का अड्डा? ददरी माफी में तड़प-तड़प कर मर रहे गौवंश, वायरल वीडियो ने खोली व्यवस्था की पोल

ट्रैक्टर से घसीटा गया मृत गौवंश, सरकारी बजट हवा में… ग्रामीणों ने लगाया घोटाले का गंभीर आरोप

जन एक्सप्रेस चित्रकूट:जनपद चित्रकूट के ब्लॉक मानिकपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत ददरी माफी की गौशाला इन दिनों अपनी बदहाल और अमानवीय स्थिति को लेकर सुर्खियों में है। शनिवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मचा दिया। वायरल वीडियो में गौशाला परिसर से एक मृत गौवंश को ट्रैक्टर में रस्सी से बांधकर घसीटते हुए देखा गया, जिसने सरकारी दावों और ज़मीनी हकीकत के बीच का भयावह अंतर उजागर कर दिया।ग्रामीणों का आरोप है कि ददरी माफी गौशाला में आएदिन गौवंश भूख, प्यास और ठंड के कारण दम तोड़ रहे हैं। हालात इतने खराब हैं कि कई दिनों तक पशुओं को चारा, दाना और पानी तक नसीब नहीं होता। जबकि सरकारी रिकॉर्ड में गौशाला के संचालन और देखभाल के लिए हर महीने मोटा बजट जारी किया जा रहा है, लेकिन ज़मीनी सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है।स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि गौशाला में मौजूद दर्जनों गौवंश कई दिनों से भूखे-प्यासे तड़प रहे हैं। भूसा, हरा चारा, दाना और साफ पानी की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है।

कई बार पशुओं को यूं ही बेसहारा छोड़ दिया जाता है, जिससे उनकी हालत दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है और अब मौतों का सिलसिला शुरू हो गया है।ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में पशुपालन विभाग और ग्राम पंचायत सचिव की मिलीभगत से बड़े स्तर पर घोटाला किया जा रहा है। कागजों में चारा, दाना, दवाइयां और कर्मचारियों का पूरा खर्च दिखा दिया जाता है, जबकि हकीकत में गौशाला में कुछ भी उपलब्ध नहीं होता। लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार वीडियो बनाकर और लिखित शिकायतें देकर संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन आज तक न तो कोई जांच टीम मौके पर पहुंची और न ही कोई ठोस कार्रवाई हुई।गौवंश प्रेमी सचिन वन्दन ने भी इस गंभीर लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि यह केवल अव्यवस्था नहीं, बल्कि खुला अपराध है। उन्होंने मांग की कि गौशाला संचालन से जुड़े सभी जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और पूरे मामले की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए। स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि यदि जिला प्रशासन ने जल्द हस्तक्षेप नहीं किया तो गौशाला में मौजूद बाकी गौवंशों की जान भी खतरे में पड़ जाएगी। फिलहाल प्रशासन की चुप्पी और विभागीय उदासीनता ने ददरी माफी गौशाला को सचमुच “मौत का अड्डा” बना दिया है, जहां बेबस गौवंश तड़प-तड़प कर दम तोड़ रहे हैं।

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