उत्तराखंडहरिद्वार

कनाडा में पहली बार 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ, डॉ. चिन्मय पण्ड्या का युग निर्माण संदेश

जन एक्सप्रेस / हरिद्वार: अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा माता भगवती देवी शर्मा के जन्मशताब्दी वर्ष के अंतर्गत कनाडा के मार्खम (टोरंटो) स्थित सनातन मंदिर में पहली बार 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ का भव्य एवं ऐतिहासिक आयोजन किया गया। इस आध्यात्मिक आयोजन में सैकड़ों परिवारों और श्रद्धालुओं ने भाग लेकर यज्ञ, संस्कार और विश्वकल्याण का संकल्प लिया।

शांतिकुंज, हरिद्वार की टोली ने वैदिक विधि-विधान के साथ महायज्ञ का संचालन कराया। 108 यज्ञ कुंडों में एक साथ प्रज्वलित अग्नि और गायत्री महामंत्र के सामूहिक उच्चारण से पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा, सकारात्मक वातावरण और भक्ति भाव से सराबोर हो गया। प्रवासी भारतीयों के साथ स्थानीय श्रद्धालुओं ने भी बड़ी संख्या में भागीदारी निभाई।

इस अवसर पर देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति एवं अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि डॉ. चिन्मय पण्ड्या वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े। उन्होंने माता भगवती देवी शर्मा के जन्मशताब्दी वर्ष में चलाए जा रहे विभिन्न अभियानों की जानकारी देते हुए कहा कि गायत्री महायज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण और समाज निर्माण का प्रभावी माध्यम है।

उन्होंने प्रवासी भारतीयों से आह्वान किया कि वे युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के विचारों और संस्कारों को अपने जीवन में अपनाएं तथा नई पीढ़ी तक भारतीय संस्कृति, सेवा, सद्भाव और नैतिक मूल्यों का संदेश पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि विश्वभर में भारतीय संस्कृति के विस्तार में प्रवासी भारतीयों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम के दौरान प्रख्यात हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल झा ने यज्ञ के वैज्ञानिक और स्वास्थ्यवर्धक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यज्ञ पर्यावरण शुद्धि के साथ मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है।

महायज्ञ के समापन अवसर पर युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के ‘युग निर्माण सत्संकल्प’ साहित्य की प्रतियां सभी प्रतिभागियों को भेंट की गईं, ताकि समाज में नैतिकता, संस्कार और राष्ट्र निर्माण की भावना को और अधिक मजबूत किया जा सके।

टोरंटो में पहली बार आयोजित इस 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ को प्रवासी भारतीय समाज ने ऐतिहासिक और प्रेरणादायक आयोजन बताया। श्रद्धालुओं ने इसे भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और वैश्विक सद्भाव को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।

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