इटावा कथा कांड: पाखंड की पोल, जाति की आग और सियासी साज़िश!

जन एक्सप्रेस/इटावा/लखनऊ : धर्म के नाम पर पाखंड, मंच पर भगवाधारी और मन में चालाकी! इटावा जिले के ददरपुर गांव में एक भागवत कथा के मंच पर जो हुआ, उसने पूरे गांव को हिला कर रख दिया। कथित ‘पंडित’ निकले फर्जी—ना गोत्र का पता, ना गुरु परंपरा का नाम। और जब असलियत सामने आई—तो बवाल मच गया।
फर्जी कथा और असली बवाल
ददरपुर गांव में हो रही थी भागवत कथा। मंच पर विराजमान थे मुकुट मणि अग्निहोत्री और संत राम तिवारी… लेकिन गांव वालों ने जब कुल, गोत्र और गुरु परंपरा पूछी, तो भगवा चोला उतरने लगा।
बड़ा खुलासा:
दोनों कथावाचक असल में निकले नवबौद्ध प्रचारक, असली नाम — मुकुट मणि यादव और संतराम यादव!
गांव वालों का गुस्सा फूटा, आरोप लगे कि महिलाओं से मंच पर अभद्रता की गई। मामला बढ़ा, तो पाखंडियों को गांव की चौपाल पर लाकर सार्वजनिक रूप से नाक रगड़वाई गई और माफ़ी मंगवाई गई।
फिर आया सियासी तूफान…
मामला यहीं नहीं रुका। जब पूरा गांव सच जान गया, तभी सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव कूद पड़े मैदान में।
प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा — “भाजपा सरकार पिछड़ों और दलितों को प्रताड़ित कर रही है।”
लेकिन सवाल ये उठा — जब खुद पीड़िता रेनू तिवारी ने साफ कहा कि महिलाओं से बदतमीज़ी हुई, तो क्या अखिलेश को सिर्फ जाति दिखी?
क्या अखिलेश ने जानबूझ कर बनाया ‘ब्राह्मण बनाम यादव’ का मुद्दा?
विश्लेषण में सामने आया:
- अखिलेश यादव ने बिना पूरी जानकारी लिए सारा मामला जातिगत राजनीति की भेंट चढ़ा दिया।
- जबकि पीड़िता ने स्पष्ट आरोप लगाया कि मंच पर मौजूद कथावाचक महिलाओं से अभद्र व्यवहार कर रहे थे।
- इस बयान के बाद गांव के लोग कहने लगे — “मुद्दा धर्म का नहीं, पाखंड और महिला अपमान का था!”
योगी सरकार का एक्शन मोड!
- 24 घंटे में गिरफ्तारी!
- योगी सरकार ने ना सिर्फ आरोपियों को हिरासत में लिया, बल्कि निष्पक्ष जांच के आदेश दिए।
- सरकार का स्पष्ट संदेश — “हम जाति नहीं, अपराध देखते हैं।”
ब्राह्मण महासभा और महिला संगठन भी उतरे मैदान में!
इन संगठनों ने मांग की:
धार्मिक धोखाधड़ी, फर्जी पहचान, और महिला शोषण की धाराओं में मुकदमा दर्ज हो और दोषियों को कड़ी सज़ा दी जाए।






