
जन एक्सप्रेस रांची/धनबाद लखनऊ: अनुसूचित जनजाति (ST) दर्जे और कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग को लेकर शनिवार से चल रहा कुड़मी समाज का रेल रोको आंदोलन अब लगभग समाप्त हो चुका है। आंदोलनकारी समाज को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बैठक का आश्वासन मिलने के बाद यह कदम उठाया गया है।
अभी दो स्टेशन पर जारी है प्रदर्शन
कुड़मी विकास मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष शीतल ओहदार ने जानकारी दी कि सिनी स्टेशन पर प्रदर्शन जल्द ही समाप्त कर दिया जाएगा, जबकि धनबाद जिले के प्रधान खंता स्टेशन पर आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक केंद्र सरकार बैठक की तारीख तय नहीं करती। उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज शांतिपूर्वक समाधान की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
कुड़मी समाज की प्रमुख मांगें
1. अनुसूचित जनजाति (ST) की सूची में शामिल किया जाए।
2. कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान दिया जाए।
इन दो प्रमुख मांगों को लेकर हजारों की संख्या में समाज के लोग रेल पटरियों पर उतर आए थे।
रेल यातायात हुआ था बुरी तरह प्रभावित
शनिवार को आंदोलन के दौरान झारखंड के रांची, धनबाद, बोकारो, रामगढ़, हजारीबाग, गिरिडीह, पूर्वी सिंहभूम समेत कई जिलों में 10 से अधिक रेलवे स्टेशनों पर पटरियों पर धरना दिया गया।100 से अधिक ट्रेनें या तो रद्द करनी पड़ीं, मार्ग बदलना पड़ा या आंशिक रूप से रोकी गईं। हालांकि कई जिलों में धारा 144 लागू थी, बावजूद इसके हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी पटरियों पर डटे रहे। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में बनाए रखा, और अब आंदोलन आंशिक रूप से समाप्त होने की ओर है।अब नजरें केंद्र सरकार और कुड़मी समाज के बीच संभावित वार्ता की तारीख पर टिकी हैं। यदि बैठक शीघ्र होती है, तो प्रधान खंता में भी आंदोलन पूरी तरह समाप्त हो सकता है।हालांकि समाज के नेताओं ने स्पष्ट किया है कि अगर आश्वासन को अमल में नहीं लाया गया, तो आंदोलन फिर से शुरू किया जा सकता है।






