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लखनऊ: विश्व हिंदू परिषद और विद्यार्थी परिषद ने केजीएमयू प्रशासन पर उठाए गंभीर सवाल

जन एक्सप्रेस/लखनऊ: विश्व हिंदू परिषद अवध प्रांत और विद्यार्थी परिषद ने आज उत्तर प्रदेश के राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपते हुए केजीएमयू प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठन ने विश्वविद्यालय में रिटायरमेंट के बाद नियुक्तियों, नियमों के खिलाफ पेंशन और धार्मिक गतिविधियों को लेकर एसटीएफ जांच की मांग की है।

ज्ञापन में कहा गया है कि केजीएमयू में रिटायरमेंट के बाद भी सैयद अख्तर अब्बास को ओएसडी (ओफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) पद पर बनाए रखना नियमों के खिलाफ है। संगठन का आरोप है कि संबंधित व्यक्ति को सेवा निवृत्त लाभ और पेंशन एडवांस कार्मिक नियमों के उल्लंघन में प्रदान की गई, जिसे एसटीएफ या किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की आवश्यकता है।

इसके अलावा, संगठन ने जम्मू में सामने आए लव जिहाद प्रकरण का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि पीड़ित पक्ष पहले केजीएमयू प्रशासन से संपर्क कर चुका था, लेकिन मामले को दबाने की कोशिश की गई। इस पर विश्व हिंदू परिषद और विद्यार्थी परिषद ने निष्पक्ष जांच की मांग की है।

संगठन ने अपने ज्ञापन में और भी कई मांगें रखी हैं। उन्होंने 2021 से 2025 के बीच हुई सभी नियमित और एडहॉक नर्सिंग समेत अन्य नियुक्तियों की पूरी जांच कराने की मांग की। इसके साथ ही विश्वविद्यालय परिसर में कथित धार्मिक वेशभूषा में आयोजित कार्यक्रमों की अनुमति देने वालों पर भी कार्रवाई की मांग की गई।

धर्मेंद्र सिंह, जन सेवा विभाग के पदाधिकारी और संगठन के प्रतिनिधि ने कहा,
“विश्व हिंदू परिषद और विद्यार्थी परिषद वर्षों से सामाजिक और शैक्षिक परिसरों को लव जिहाद और धर्मांतरण जैसी गतिविधियों से मुक्त रखने के लिए काम कर रही है। केजीएमयू में रिटायरमेंट के बाद पद देना, नियमों के विरुद्ध पेंशन देना और मामलों को दबाने का प्रयास – ये सभी गंभीर विषय हैं। हम मांग करते हैं कि एसटीएफ से निष्पक्ष जांच कराई जाए और जो भी दोषी होगा, उस पर कठोर कार्रवाई हो।”

ज्ञापन सौंपते समय संगठन के पदाधिकारी इस बात पर भी जोर दे रहे थे कि विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित शैक्षिक संस्थान में पारदर्शिता और नियमों का पालन होना आवश्यक है। उनका कहना है कि यदि नियमों का उल्लंघन किया गया है, तो इसके खिलाफ कठोर कदम उठाना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामले विश्वविद्यालयों में प्रशासनिक पारदर्शिता और नियमों के पालन की आवश्यकता को उजागर करते हैं। शिक्षा संस्थान केवल शिक्षा देने का केंद्र नहीं हैं, बल्कि यहां प्रशासनिक अनुशासन, नियमों का पालन और नैतिक मूल्यों का भी प्रशिक्षण देना जरूरी है।

इससे पहले भी विश्व हिंदू परिषद और विद्यार्थी परिषद ने समय-समय पर विश्वविद्यालयों में धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों पर निगरानी रखी है। उनका कहना है कि किसी भी प्रकार की अनियमितताओं या नियमों के उल्लंघन को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

राज्यपाल और मुख्यमंत्री को सौंपे गए ज्ञापन में संगठन ने स्पष्ट रूप से मांग की कि सभी आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो। विशेष रूप से रिटायरमेंट के बाद नियुक्तियों, नियमों के खिलाफ पेंशन और विश्वविद्यालय में धार्मिक गतिविधियों की अनुमति देने वालों पर कार्रवाई की जाए।

संगठन का यह भी कहना है कि यदि प्रशासन गंभीरता से कार्रवाई नहीं करता है, तो वे भविष्य में और भी व्यापक स्तर पर इस मुद्दे को उठाएंगे। उनका मकसद केवल नियमों का पालन सुनिश्चित करना और विश्वविद्यालयों में पारदर्शिता बनाए रखना है।

केजीएमयू प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार प्रशासन मामले की जांच कर रहा है और जल्द ही प्रतिक्रिया देने की संभावना है।

इस पूरी घटना ने लखनऊ और पूरे उत्तर प्रदेश में शिक्षा और प्रशासन के पारदर्शिता के मुद्दों पर बहस को फिर से तेज कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि विश्वविद्यालयों में नियमों के पालन की निगरानी के लिए समय-समय पर स्वतंत्र जांच की आवश्यकता होती है, ताकि किसी भी अनियमितता को रोका जा सके।

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