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दहेज की आग में झुलसी विवाहिता: ससुराल से निकाली गई, मासूम बेटी से भी छीन लिया गया मां का अधिकार

जन एक्सप्रेस/जौनपुर: जौनपुर जनपद के कोतवाली क्षेत्र से दहेज उत्पीड़न का एक अत्यंत हृदयविदारक मामला सामने आया है, जिसने समाज और व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विवाह के कुछ ही महीनों बाद एक नवविवाहिता को उसके ही ससुराल वालों ने कथित रूप से मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर घर से बाहर निकाल दिया। पीड़िता का आरोप है कि दहेज की मांग पूरी न होने पर उसे न केवल प्रताड़ना झेलनी पड़ी, बल्कि उसकी गोद से उसकी मासूम बच्ची भी छीन ली गई।

पीड़िता आन्तमा गुप्ता का विवाह 25 नवंबर 2024 को हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार सिद्धार्थ गुप्ता पुत्र शिव कुमार गुप्ता, निवासी ख्वाजादोस्त (सिपाह चौराहा), कोतवाली जौनपुर के साथ संपन्न हुआ था। विवाह के समय पीड़िता के परिजनों ने अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार दहेज दिया था, जिसमें सोने-चांदी के आभूषण, पायल, अंगूठियां, चांदी का नारियल, पान-सुपारी, मछली तथा लगभग तीन लाख रुपये नकद व ऑनलाइन माध्यम से दिए गए थे।

पीड़िता का आरोप है कि विवाह के कुछ ही दिनों बाद ससुराल पक्ष का व्यवहार अचानक बदल गया। सास किरण गुप्ता, ससुर शिव कुमार गुप्ता, देवर हर्ष गुप्ता तथा पति सिद्धार्थ गुप्ता ने मिलकर दहेज को लेकर ताने देना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे यह ताने मानसिक उत्पीड़न और फिर शारीरिक हिंसा में बदल गए।

पीड़िता का कहना है कि उसे घर में बंद कर रखा गया, बाहरी लोगों से मिलने नहीं दिया जाता था और आए दिन मारपीट की जाती थी। इस दौरान उसने एक बच्ची को जन्म दिया, लेकिन आरोप है कि ससुराल वालों ने उसे अपनी ही संतान से मिलने तक से रोक दिया। एक मां के लिए यह पीड़ा किसी सजा से कम नहीं थी।

पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि 12 सितंबर 2025 को कुछ असामाजिक तत्वों की मौजूदगी में उस पर दबाव बनाकर एक समझौता पत्र पर जबरन हस्ताक्षर करा लिए गए। इस दौरान उसे मानसिक रूप से इतना भयभीत कर दिया गया कि वह विरोध भी नहीं कर सकी।

समझौते के बाद ससुराल पक्ष ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि वह दोबारा घर लौटना चाहती है, तो उसे मोटरसाइकिल और तीन लाख रुपये नकद लेकर आना होगा। मांग पूरी न होने पर उसे घर में प्रवेश न देने की चेतावनी दी गई।

आरोप है कि इसके बाद पीड़िता के साथ गाली-गलौज की गई, जान से मारने की धमकी दी गई और अंततः उसे घर से भगा दिया गया। किसी तरह उसने अपने रिश्तेदारों को सूचना दी और मायके पहुंचकर अपनी जान बचाई।

पीड़िता का कहना है कि उसके निजी सोने-चांदी के आभूषण—पायल, लॉकेट, झुमके और मारवाड़ी नथूनी—ससुराल पक्ष ने जबरन अपने पास रख लिए, जिन्हें लौटाने से भी इनकार किया जा रहा है।

सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि पीड़िता के माता-पिता का पहले ही निधन हो चुका है। वह पूरी तरह असहाय स्थिति में है और अब न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।

न्याय की आस में पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक जौनपुर को शिकायती पत्र सौंपते हुए पति समेत सभी आरोपियों के विरुद्ध दहेज उत्पीड़न, मारपीट, धमकी और स्त्रीधन हड़पने जैसी धाराओं में कठोर कार्रवाई की मांग की है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामला संज्ञान में ले लिया गया है। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी गई है और तथ्यों के आधार पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला एक बार फिर यह सोचने को मजबूर करता है कि कानून के बावजूद दहेज जैसी कुप्रथा आज भी बेटियों का जीवन तबाह कर रही है।

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