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रहस्यमय बीमारी से गांव में हड़कंप, एक सप्ताह में आधा दर्जन से अधिक मवेशियों की मौत

जन एक्सप्रेस/जौनपुर: जौनपुर जनपद के बदलापुर विकास खंड अंतर्गत गोमती नदी के किनारे बसे सुतौली गांव में इन दिनों एक रहस्यमय बीमारी ने पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है। बीते एक सप्ताह के भीतर गांव में आधा दर्जन से अधिक मवेशियों की असामयिक मौत हो चुकी है। मरने वाले पशुओं में भैंस, गाय, बछड़े और बकरियां शामिल हैं। अचानक हो रही इन मौतों से गांव में भय और असमंजस का माहौल बना हुआ है।

अजीब लक्षणों के साथ हो रही मौत

पशुपालकों के अनुसार बीमारी के लक्षण बेहद डरावने हैं। जैसे ही मवेशी इसकी चपेट में आते हैं, वे सबसे पहले चारा और पानी पूरी तरह छोड़ देते हैं। इसके बाद वे खूंटे, दीवार, पेड़ या जमीन पर लगातार सिर रगड़ने लगते हैं। कई बार इतनी तेजी से सिर रगड़ते हैं कि उनके सिर से खून तक निकलने लगता है। पशु बार-बार बैठते और उठते रहते हैं तथा जीभ को लगातार लपलपाते रहते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि इस अवस्था में मवेशी अधिक देर तक खड़े भी नहीं रह पाते। तीन से चार दिनों तक तड़पने के बाद उनकी मौत हो जाती है। इन घटनाओं ने पूरे गांव को भयभीत कर दिया है।

किन-किन पशुओं की हो चुकी है मौत

इस रहस्यमय बीमारी से सुतौली गांव निवासी ओमकार गौतम की दो भैंसों की मौत हो चुकी है। वहीं जयनाथ गौतम की एक भैंस, हंसराज उर्फ शटरू की एक गाय, सागर गौतम का एक बछड़ा और दो बकरियां भी काल के गाल में समा चुकी हैं। इसके अलावा पड़ोसी सूरज गौतम की एक भैंस इस समय बीमारी की चपेट में बताई जा रही है, जिसका इलाज चल रहा है।

पशुपालकों में भय का माहौल

लगातार हो रही पशु मौतों से पशुपालक बेहद चिंतित हैं। गांव के कई लोगों का कहना है कि मवेशी ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन हैं। ऐसे में इस तरह अचानक जानवरों की मौत होना उनके लिए आर्थिक संकट भी पैदा कर रहा है। पशुपालकों को डर सता रहा है कि यदि बीमारी और फैली तो गांव के अन्य पशु भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।

ग्रामीणों ने प्रशासन और पशुपालन विभाग से गांव में कैंप लगाकर जांच कराने और बीमारी पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।

चिकित्सकों का क्या कहना है

इस मामले में पशु चिकित्सा अधिकारी घनश्यामपुर, डॉक्टर टी.एन. ने बताया कि मवेशियों में दिखाई दे रहे लक्षणों के आधार पर यह बीमारी कुत्ते के काटने से होने वाली प्रतीत होती है। उन्होंने कहा कि कई बार आवारा कुत्तों के काटने से पशुओं में इस तरह के लक्षण देखने को मिलते हैं, जिसके बाद समय पर इलाज न मिलने से उनकी मौत हो जाती है।

डॉक्टर ने पशुपालकों को सलाह दी है कि यदि किसी पशु में ऐसे लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत अन्य पशुओं से अलग रखें और बिना देर किए पशु चिकित्सक को सूचना दें।

रोकथाम को लेकर जागरूकता की जरूरत

ग्रामीणों का मानना है कि गांव और आसपास के क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिस पर अब तक कोई ठोस नियंत्रण नहीं किया गया है। पशुपालकों ने मांग की है कि आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के साथ-साथ पशुओं के टीकाकरण और नियमित जांच की व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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