उत्तर प्रदेशलखनऊ

पंकज चौधरी का बड़ा बयान — दंद-फंद की राजनीति नहीं, सबको साथ लेकर चलना मेरी प्राथमिकता

जन एक्सप्रेस लखनऊ।भाजपा के नव निर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष एवं भारत सरकार में राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट और बेबाक अंदाज में संगठनात्मक प्राथमिकताओं को सामने रखा। उन्होंने कहा कि वह “दंद-फंद की राजनीति” में विश्वास नहीं रखते और सभी को साथ लेकर चलना ही उनका मूल मंत्र है।पंकज चौधरी ने कहा कि 25 दिसंबर को मनाई जाने वाली अटल जयंती को और अधिक प्रभावी तथा जन-जन तक पहुंचाने के लिए पार्टी ने विस्तृत रोडमैप तैयार किया है। उन्होंने बताया कि 25 से 31 दिसंबर तक प्रदेश भर में ‘सुशासन दिवस’ के तहत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनके माध्यम से अटल बिहारी वाजपेई और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को जमीन पर उतारने का प्रयास किया जाएगा।अपने संबोधन में उन्होंने अटल सरकार के कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए चतुर्थ वित्त आयोग, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना सहित कई जनकल्याणकारी योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेई ने देश को राजनीतिक स्थिरता के साथ-साथ विकास की नई दिशा दी और उनकी नीतियां आज भी प्रासंगिक हैं।
प्रदेश अध्यक्ष ने भाजपा को संगठन आधारित पार्टी बताते हुए कहा कि यही भाजपा की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा, “भाजपा ही एकमात्र ऐसी पार्टी है, जहां साधारण और गरीब परिवार से आने वाला कार्यकर्ता भी मेहनत और समर्पण के बल पर शीर्ष पदों तक पहुंच सकता है।” उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए उन्हें “पारिवारिक पार्टियां” करार दिया और कहा कि वहां आम कार्यकर्ता के लिए आगे बढ़ने के अवसर सीमित रहते हैं।पंकज चौधरी ने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में हमेशा मान-सम्मान और कार्यकर्ताओं की गरिमा की रक्षा को प्राथमिकता दी है और आगे भी प्रदेश के हर कार्यकर्ता के हित में काम करते रहेंगे। उन्होंने संगठन को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि भाजपा में विचारधारा और समर्पण ही नेतृत्व की असली पहचान है।हालांकि, उनके पूरे संबोधन में एक तथ्य राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना रहा। उन्होंने अपने भाषण के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम नहीं लिया और न ही उनके कार्यों का उल्लेख किया। इसे लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं, हालांकि उन्होंने किसी भी प्रकार के मतभेद से इनकार करते हुए संगठनात्मक एकता पर जोर दिया।अपने राजनीतिक अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि राजनीति में कई बार योग्यता और परिस्थितियों के बीच संतुलन बनता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “आजम खां मुख्यमंत्री नहीं बने, जबकि कई और बन गए,” जिससे राजनीतिक समीकरणों की ओर परोक्ष इशारा माना जा रहा है।अटल जयंती के मंच से दिया गया यह बयान न सिर्फ संगठन को स्पष्ट संदेश देने वाला रहा, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भाजपा नेतृत्व में विचारधारा, संगठन और समर्पण को ही सबसे अधिक महत्व दिया जाता

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