उत्तर प्रदेशप्रतापगढ़

राष्ट्र,धर्म एवं समाज सेवा हेतु संघ के स्वयंसेवकों ने स्वयं को किया समर्पित

जनेक्सप्रेस ब्यूरो, प्रतापगढ़/विचार और साधना के गौरवशाली यात्रा के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण किये है। संघ के स्वयंसेवकों ने राष्ट्र ,धर्म एवं समाज की सेवा के लिये स्वयं को समर्पित किया है। परिस्थिति कैसी भी रही लेकिन जो चुनोतियों मिली उसका मजबूती से साथ मुकाबला किया। हिन्दू समाज को तोड़ने का षड्यंत्र देश मे ही नही वरन विदेशों से भी किया गया लेकिन उनके प्रयास कभी सफल नही हुये। मन मे भारत माँ की जय की धुन और समाज के जागरण का संकल्प के साथ संघ की यात्रा अनथक और अविरल बहती रही। हिन्दू समाज को एकजुट होकर इस राष्ट्र का विश्व सिरमौर बनाना है। उक्त विचार प्रतापगढ़ के मंगरौरा खंड में बतौर मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद जिला संघ चालक चिंतामणि ने व्यक्त की। उन्होंने संघ शताब्दी वर्ष का मूलमंत्र का विषय पंच प्रण अर्थात कुटुंब प्रबोधन सामाजिक समरसता पर्यावरण संरक्षण स्वदेशी भाव जागरण एवं नागरिक कर्तव्य को बताया जिसके आधार पर भारत परम वैभव को प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज के पुनर्जागरण के उद्देश्य के साथ वर्ष 1925 में विजयादशमी के दिन संघ की स्थापना हुई। इन 100 वर्षों के काल खंड में संघ ने समाज की उपेक्षा, विरोध और स्वीकारोक्ति को देखा है। आज समाज ने संघ के कार्यो को अपनी सहमति के साथ स्वीकार्य किया है। संघ अपने सेवा कार्यो के माध्यम से समाज के मध्य एक जगह बनाई है। यहां जाति पात ऊंच नीच के भेदभाव का कोई स्थान नही है। सर्व हिन्दू समाज एकजुट होकर आगे बढ़ना है। उन्होंने समाजिक समरसता के संदेश देते हुये कहा कि भगवान राम ने सबरी के बेर खाकर , निषाद और जटायू को गले लगाकर वर्गभेद मिटाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के आदर्शां को अपनाकर देश में रामराज्य की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता जितेन्द्र बहादुर सिंह, उद्बोधन जिला संघ चालाक चिंतामणि, खण्ड संघचालक कृपाशंकर, खंडकार्यवाह कुलभासकर, सहखंड कार्यवाह उमेश, जिला शारिरिक शिक्षण प्रमुख संतराम, मंडल प्रमुख अरुण, खंड संपर्क प्रमुख प्रदीप, नारायणपुर मंडल अध्यक्ष जितेंद्र बहादुर सिंह, कोहड़ौर मंडल अध्यक्ष विद्या सागर, कोहड़ौर चेयरमैन प्रतिनिधि किशन सोनी, महेंद्र प्रताप सिंह, दिनेश सिंह, विमल पाण्डेय के साथ ही काफी संख्या में स्वयंसेवक उपस्थिति रहे।

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