पर्यावरण संरक्षण
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45 साल बाद अपने स्कूल लौटे अभयराज बिष्ट, गुरु का सम्मान कर स्कूल को बनाया योगशाला | अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026
जन एक्सप्रेस /उत्तरकाशी कुछ कहानियां सिर्फ खबर नहीं होतीं, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा बन जाती हैं। ऐसी ही एक मिसाल उत्तरकाशी के ऐतिहासिक प्राथमिक विद्यालय टकाना में देखने को मिली, जहां 45 साल पहले पांचवीं कक्षा पास करने वाले एडवोकेट अभयराज सिंह बिष्ट अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर अपनी पत्नी सुचिता बिष्ट के साथ लौटे। वर्ष 1919 से…
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उत्तर प्रदेश
डीएम की अध्यक्षता में जिला वृक्षारोपण, गंगा एवं पर्यावरण समिति की बैठक संपन्न
जन एक्सप्रेस/ हरदोई: जिला वृक्षारोपण समिति, जिला पर्यावरण समिति एवं जिला गंगा समिति की संयुक्त बैठक जिलाधिकारी अनुनय झा की अध्यक्षता में स्वामी विवेकानंद सभागार में आयोजित की गई। बैठक में वृक्षारोपण अभियान, पर्यावरण संरक्षण और नदियों के पुनरोद्धार से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को वृक्षारोपण के लिए निर्धारित…
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उत्तरकाशी
पुराणों में गंगा दिव्यता, दर्शन और पर्यावरणीय चेतना की अविरल पावन धारा
जन एक्सप्रेस/उत्तरकाशी: हमारे पुराणों में गंगा का स्वरूप केवल एक भौगोलिक नदी के रूप में नहीं, बल्कि सृष्टि, जीवन और चेतना की आधारधारा के रूप में वर्णित किया गया है। पौराणिक संदर्भों में गंगा की उत्पत्ति, स्वरूप और महत्व को अत्यंत गूढ़ एवं दार्शनिक दृष्टि से स्पष्ट किया गया है, जो आधुनिक पर्यावरणीय सोच के साथ भी गहरा सामंजस्य स्थापित…
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उत्तरकाशी
उत्तरकाशी की ‘वेस्ट टू रिसोर्स’ पहल को स्कॉच गुड गवर्नेंस अवार्ड
जन एक्सप्रेस/उत्तरकाशी: नई दिल्ली में आयोजित SKOCH Awards के 106वें संस्करण में जनपद उत्तरकाशी को ‘वेस्ट टू रिसोर्स’ प्रोजेक्ट के लिए सम्मानित किया गया। यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं की आर्थिकी को सशक्त बनाने की दिशा में एक सफल मॉडल के रूप में उभरी है। जिलाधिकारी के निर्देशन में रीप (REAP) परियोजना के…
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उत्तरकाशी
गंगा नदी का वैज्ञानिक सच: आत्मशुद्धि शक्ति और बढ़ता प्रदूषण संकट
जन एक्सप्रेस/उत्तरकाशी: गंगा को यदि केवल एक नदी कहा जाए, तो यह उसकी वास्तविक पहचान को सीमित कर देना होगा। गंगा दरअसल एक ऐसी निरंतर प्रवाहित जीवनधारा है, जो हिमालय की गोद से निकलकर मैदानों, नगरों, खेतों और अंततः सागर तक पहुँचते हुए अनगिनत जीवों, समाजों और पारिस्थितिक तंत्रों को जोड़ती है। यह नदी केवल जल का प्रवाह नहीं, बल्कि…
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