उत्तर प्रदेशबस्ती
आदर्श शासन के स्थापना का प्रतीक है श्रीराम का राज्याभिषेक

जन एक्सप्रेस बस्ती: रावण एक प्रवृत्ति है। उसके अंत के लिये श्रीराम की शरण लेना पड़ता है। जनम-जनम मुनि जतन कराही। अन्त राम कहि आवत नाहीं।। साधारण मनुष्य और परमात्मा में यही अन्तर है कि परमात्मा जिसे मारते हैं उसे तारते भी हैं। श्रीराम अति सहज है। निर्मल मन जन सो मोहि पावा। मोहि कपट छल छिद्र न भावा।। वे शरणागत की रक्षा करते हैं। रावण के अत्याचारों से त्रस्त होकर विभीषण जब श्रीराम के शरण में आये तो उन्होने विभीषण को गले लगा लिया । यह सद् विचार कथा व्यास आचार्य रामेश्वर नारायण ने बहादुरपुर विकास खण्ड के नरायनपुर बढईपुरवा गांव में 9 दिवसीय संगीतमयी श्रीराम कथा को विश्राम देते हुये व्यक्त किया।महात्मा जी ने भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक प्रसंग की कथा सुना श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिए। उन्होंने कहा कि जब प्रभु श्रीराम वनवास पूर्ण कर अयोध्या लौटे तो सम्पूर्ण अयोध्यावासी आनंद में डूब गए। नगर को दीपों से सजाया गया और पुष्पवर्षा हुई। वहीं संतों महात्माओं, ऋषियों और देश देशांतर के राजाओं की उपस्थिति में राम का राज्याभिषेक किया गया। महाराज ने कहा कि श्रीराम का राज्याभिषेक केवल एक धार्मिक घटना नहीं बल्कि आदर्श शासन की स्थापना का प्रतीक है। जहाँ धर्म, न्याय और करुणा का समावेश होता है।कहा कि भगवान कण-कण में विराजमान हैं अगर हम समाज में दीन दुखियों जरूरतमंदों की सेवा करते हैं तो भगवान हमसे खुश रहते हैं। जिस प्रकार भगवान श्री राम ने दीन दुखियों वनवासियों आदिवासियों के कष्ट दूर करते हुए उन्हें संगठित करने का कार्य किया उसी तरह हमें भी सभी को संगठित करने का कार्य करना है।
श्रीराम कथा में मुख्य यजमान रणजीत सिंह उर्फ पल्लू सिंह, लालजीत सिंह, सर्वजीत सिंह ने विधि विधान से कथा व्यास का पूजन अर्चन किया। संरक्षक आशीष सिंह, राना दिनेश प्रताप सिंह, कपिल देव सिंह, जिला प्रचारक शिवेन्द्र , राम प्रकाश सिंह परम हंस शुक्ला, महेश्वर सिंह, राम बदन, रत्नेश्वर सिंह, नरेन्द्र पाण्डेय के साथ ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। हवन, यज्ञ, भण्डारे के साथ कथा सम्पन्न हुई।






