
जन एक्सप्रेस /पुरोला :- उत्तरकाशी के रवाईं घाटी क्षेत्र में टमाटर उत्पादक किसान इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। मंडियों में टमाटर के बेहद कम दाम मिलने और परिवहन लागत लगातार बढ़ने से किसानों को अपनी मेहनत की फसल सड़कों पर फेंकने और खेतों में छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इससे किसानों में भारी निराशा और आक्रोश है।
टमाटर उत्पादक किसान हरदेव सिंह, प्रदीप सिंह, धर्मेंद्र, सोवेन्द्र सिंह और राजेंद्र सिंह राणा ने बताया कि टमाटर को मंडियों तक पहुंचाने में वाहन किराया, मजदूरी, पैकिंग और अन्य खर्च इतना अधिक हो जाता है कि बिक्री से मिलने वाली राशि लागत भी पूरी नहीं कर पाती। ऐसे में मंडी तक फसल भेजना घाटे का सौदा साबित हो रहा है। मजबूरी में कई किसान खेतों में ही टमाटर छोड़ रहे हैं, जबकि कई किसानों को सड़क पर फसल फेंकनी पड़ रही है।
किसानों का कहना है कि उन्होंने टमाटर की खेती के लिए बैंकों और सहकारी समितियों से कृषि ऋण लिया है। अच्छी पैदावार के बावजूद उचित मूल्य नहीं मिलने से अब ऋण चुकाना मुश्किल हो गया है। खेती से होने वाली आय पर ही परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की शिक्षा और रोजमर्रा के खर्च निर्भर हैं, लेकिन मौजूदा स्थिति में उनकी आजीविका पर संकट गहरा गया है।
किसानों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो बड़ी संख्या में किसान टमाटर की खेती छोड़ने को मजबूर हो जाएंगे, जिससे क्षेत्र की कृषि व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
किसानों ने सरकार से टमाटर का समर्थन मूल्य (MSP) घोषित करने, स्थानीय स्तर पर खरीद केंद्र खोलने, परिवहन पर अनुदान देने तथा आर्थिक राहत पैकेज उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी कि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं होने पर वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।






