असमय बारिश से बुंदेलखंड में किसानों की कमर टूटी: 80% धान की फसल बर्बाद
बुन्देलखण्ड मुक्ति मोर्चा ने मुख्यमंत्री से तत्काल राहत व मुआवज़े की मांग की

जन एक्सप्रेस चित्रकूट। बुंदेलखंड क्षेत्र में इस बार हुई असमय और लगातार बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। खेतों में पकने को तैयार धान की फसलें जलमग्न होकर सड़ चुकी हैं, कई जगह बालियों में अंकुर फूट आए हैं। ग्रामीण इलाकों से मिली जानकारी के अनुसार लगभग 80 प्रतिशत धान की फसल पूरी तरह चौपट हो गई है।स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एड. प्रखर पटेल और समाजसेवी मुकेश कुमार के नेतृत्व में बुन्देलखण्ड मुक्ति मोर्चा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जिलाधिकारी चित्रकूट के माध्यम से ज्ञापन सौंपा, जिसमें किसानों के लिए तात्कालिक राहत, मुआवज़ा और ब्याजमुक्त सहायता की मांग की गई है।
“यह सिर्फ फसल नहीं, किसानों के जीवन का प्रश्न है”
मोर्चा द्वारा मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में कहा गया है—“यह केवल फसलों का नुकसान नहीं, बल्कि किसानों के जीवन और भविष्य का प्रश्न है। जिस किसान की मेहनत पर प्रदेश की अन्न-व्यवस्था टिकी है, आज वही किसान असहाय खड़ा है।बुंदेलखंड क्षेत्र पहले से ही सूखा, पलायन और आर्थिक पिछड़ेपन की मार झेल रहा है। ऐसे में यह बारिश किसानों के लिए विनाशकारी साबित हो रही है। खेतों में पानी भर जाने से न केवल धान, बल्कि मसूर, चना और आलू जैसी आगामी रबी फसलों की तैयारी भी ठप पड़ गई है।
किसानों की चार प्रमुख मांगें
1. राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीमों द्वारा तत्काल सर्वे कराया जाए।
2. प्रभावित किसानों को राहत राशि और मुआवज़ा दिया जाए।
3. अगली फसल के लिए ब्याजमुक्त ऋण, बीज और खाद की सहायता दी जाए।
4. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की समीक्षा कर उसका लाभ ज़मीनी स्तर तक पहुँचाया जाए।
“धान के खेतों में अब सिर्फ निराशा है”
एड. प्रखर पटेल और मुकेश कुमार ने कई गांवों का दौरा कर खेतों की स्थिति देखी। उन्होंने बताया, हमने खेतों में जाकर देखा कि धान की 80 प्रतिशत फसल पूरी तरह खराब हो चुकी है। पकी हुई फसलें पानी में डूबकर अंकुरित हो गई हैं। किसानों के चेहरों पर निराशा और असहायता साफ झलक रही है। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड का किसान हमेशा उम्मीद बोता है, लेकिन इस बार मौसम ने उसकी सारी मेहनत तबाह कर दी।
कृषि आपदा घोषित कर सरकार तत्काल राहत दे
मोर्चा ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि इस स्थिति को कृषि आपदा घोषित करते हुए बुंदेलखंड सहित सभी प्रभावित जिलों के किसानों के लिए राहत पैकेज की घोषणा की जाए।किसान प्रदेश की आत्मा हैं—उनकी पीड़ा ही प्रदेश की पीड़ा है। सरकार को इस त्रासदी को केवल प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि किसानों के अस्तित्व से जुड़ा संकट मानते हुए तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए। इस मौके पर एड. प्रखर पटेल, समाजसेवी मुकेश कुमार, अनुपम, भरत, कृष्णकांत, महेंद्र सिंह, सुभील, राहुल, सुनील, केशव द्विवेदी, अयूब अली, राजकुमार, चूड़ामणि, नवाब अली, रससदवा, बैजनाथ, सुनील भगत, अरविंद, राम अभिलाष, सुधीर, उज्जैन, कामता, महादेव, रामसागर, अतुल, विनीत, अलफ नारायण, महेश, राम-लखन, छोटके, अभिलाष, गौरव, ज्ञानेंद्र, आशीष, मेहंदी हुसैन, अशोक उपाध्याय, इरसाद अली, संतोष व बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।






