
जन एक्सप्रेस /विकास नगर :- जिला कांग्रेस कमेटी पछवा दून के अध्यक्ष संजय किशोर ने प्रेस वार्ता कर भाजपा सरकार पर राज्य की बहुमूल्य सरकारी भूमि एवं संपत्तियों को निजी कंपनियों को लीज/पीपीपी के माध्यम से सौंपने का आरोप लगाया।कहा कि सरकार द्वारा उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर बोर्ड (UIIDB) के माध्यम से सरकारी विभागों की बेशकीमती जमीनों और संपत्तियों को लंबे समय के लिए निजी हाथों में देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने कहा कि यह विषय केवल सरकारी संपत्ति का नहीं, बल्कि राज्य के सार्वजनिक संसाधनों और भविष्य की पीढ़ियों से जुड़ा गंभीर प्रश्न है।उन्होंने जॉर्ज एवरेस्ट, मसूरी (हाथीपांव) की भूमि का उदाहरण देते हुए दस्तावेजों के आधार पर कहा कि लगभग 442 एकड़ भूमि को राजस एयरो स्पोर्ट्स एंड एडवेंचर प्राइवेट लिमिटेड को 45 वर्ष के लिए ₹1 करोड़ प्रतिवर्ष की लीज पर दिए जाने का मामला सामने आया है। उनके अनुसार, इसी भूमि पर पूर्व में लगभग ₹23 करोड़ खर्च किए गए थे। उन्होंने इस पूरे मामले में निविदा प्रक्रिया और लीज की शर्तों की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।
संजय किशोर ने कहा कि 17 अक्टूबर 2023 को लागू उत्तराखंड इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कानून के तहत सरकारी भूमि एवं संपत्तियों को लीज अथवा पीपीपी मॉडल पर देने की व्यवस्था बनाई गई है। उनके अनुसार, मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली अनुशंसा समिति की संस्तुति के बाद मुख्यमंत्री द्वारा अंतिम निर्णय लिए जाने की व्यवस्था के कारण सरकारी संपत्तियों के हस्तांतरण में अत्यधिक केंद्रीकरण हो गया है।उन्होंने दावा किया कि अब तक लगभग 1200 एकड़ यानी करीब 6000 बीघा भूमि से संबंधित प्रस्तावों पर मुख्यमंत्री स्तर से निर्णय किए जा चुके हैं, जबकि कई हजार बीघा भूमि के प्रस्ताव विभिन्न स्तरों पर लंबित हैं। उन्होंने सरकार से इन सभी प्रस्तावों और निर्णयों को सार्वजनिक करने की मांग की।कहा कि लोक निर्माण विभाग के 25 निरीक्षण भवनों तथा पर्यटन विभाग की कुछ संपत्तियों को निजी हाथों में लीज/पीपीपी पर देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने नैनीताल के पटुवाडागर की 14 एकड़ भूमि, हरिद्वार के अलकनंदा होटल तथा ऋषिकेश के लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवन का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार को इन संपत्तियों के संबंध में पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।उन्होंने आरोप लगाया कि निविदाओं की शर्तें ऐसी रखी जा रही हैं जिससे स्थानीय व्यक्ति अथवा स्थानीय कंपनियों के लिए भागीदारी कठिन हो सकती है। कांग्रेस नेता ने मांग की कि सरकारी भूमि एवं संपत्तियों को लीज अथवा पीपीपी पर देने से पहले सार्वजनिक पारदर्शिता, उचित मूल्यांकन और स्थानीय हितों को प्राथमिकता दी जाए।
उन्होंने 2022 में मंत्रिमंडल द्वारा सरकारी जमीनों की बिक्री एवं एक विभाग से दूसरे विभाग को भूमि हस्तांतरण संबंधी अंतिम अधिकार मुख्यमंत्री को दिए जाने के निर्णय पर भी सवाल उठाए और कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण निर्णयों में मंत्रिमंडल की सामूहिक जिम्मेदारी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन होना चाहिए।कहा कि दूसरी ओर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (NLU) सहित जनहित से जुड़े संस्थानों के लिए भूमि उपलब्ध कराने के प्रस्ताव लंबित हैं। उन्होंने कहा कि यदि राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों के लिए भूमि उपलब्ध कराने के प्रस्ताव लंबित रह सकते हैं, तो सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि सरकारी भूमि और संपत्तियों को निजी हाथों में देने में इतनी तेजी क्यों दिखाई जा रही है। कहा कि कांग्रेस पार्टी सरकारी भूमि एवं सार्वजनिक संपत्तियों से जुड़े प्रत्येक निर्णय में पारदर्शिता, उचित मूल्यांकन और जनहित सुनिश्चित करने की मांग करती है तथा इस विषय को जनता के बीच प्रमुखता से उठाएगी।प्रेस वार्ता मे मौजूद प्रदेश कांग्रेस के सचिव शम्मी प्रकाश, जिला उपाध्यक्ष जीतेन्द्र रावत, जिला महासचिव फुरकान अहमद उपस्थित रहे।




