जन एक्सप्रेस /उत्तराखंड
रिपोर्ट – ज्योत सिंह बघियाल
नई टिहरी। महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत बाल विकास परियोजना चंबा में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के सहयोग से आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों के लिए एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में आंगनबाड़ी केंद्रों पर स्कूल पूर्व शिक्षा के तहत बच्चों के साथ कराई जाने वाली विभिन्न गतिविधियों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा को अधिक रोचक, सहज और प्रभावी बनाना रहा। सेमिनार के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों ने विभिन्न शैक्षणिक एवं रचनात्मक गतिविधियों का प्रस्तुतीकरण किया। इस दौरान चर्चा की गई कि छोटे बच्चों को खेल-खेल में पढ़ने, लिखने और नई चीजें सीखने के लिए किस प्रकार प्रेरित किया जा सकता है। कार्यक्रम में बच्चों के भाषा विकास पर विशेष जोर दिया गया। कविताओं और संवाद आधारित गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में भाषा कौशल विकसित करने के तरीकों पर चर्चा हुई। आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों ने बताया कि बच्चों से लगातार संवाद और बातचीत करने से उनमें अपनी बात व्यक्त करने का आत्मविश्वास बढ़ता है। इसके साथ ही बच्चों की रुचि और उनकी सीखने की क्षमता को ध्यान में रखते हुए गतिविधियों का चयन करने पर भी जोर दिया गया।
सेमिनार में खेलों के माध्यम से बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ावा देने के तरीकों पर भी चर्चा की गई। कार्यकर्त्रियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि खेल आधारित गतिविधियां बच्चों को सीखने के साथ-साथ सक्रिय बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में सोचने, समझने और नई चीजों को सीखने की क्षमता विकसित की जा सकती है। कार्यक्रम में जिला कार्यक्रम अधिकारी संजय गौरव ने आंगनबाड़ी केंद्रों के उद्देश्यों और बच्चों के सर्वांगीण विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा और विकास की नींव मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से कार्यकर्त्रियों को अपने अनुभव साझा करने और बेहतर कार्य पद्धतियों को समझने का अवसर मिलता है। बाल विकास परियोजना अधिकारी ममता लेखक ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण और संवादात्मक कार्यक्रमों से आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों का मनोबल बढ़ता है। साथ ही उन्हें अपने कार्यों को और बेहतर तरीके से करने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि समय-समय पर ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि कार्यकर्त्रियों को बच्चों की जरूरतों और प्रारंभिक शिक्षा की नई गतिविधियों से अवगत कराया जा सके।
वन स्टॉप सेंटर की केंद्र प्रशासक बिष्ट रश्मि ने आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों को विभाग की महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने वन स्टॉप सेंटर की कार्यप्रणाली और हिंसा से प्रभावित महिलाओं को उपलब्ध कराई जाने वाली विभिन्न सेवाओं की जानकारी भी दी। इस दौरान महिलाओं को सहायता और संबंधित सेवाओं के बारे में जागरूक करने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।कार्यक्रम में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन से मंजू रावत और मुनाजिर हुसैन, मिशन शक्ति से रमेश, नवीन एवं कीर्ति कुमारी सहित सुपरवाइजर और बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियां मौजूद रहीं। सेमिनार का आयोजन ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक रहा। इसमें प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया और बच्चों की स्कूल पूर्व शिक्षा को अधिक प्रभावी, आनंददायक एवं रोचक बनाने के लिए अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए गतिविधि आधारित एवं संवादात्मक शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।






