
जन एक्सप्रेस हरिद्वार(चंद्रप्रकाश बहुगुणा): दक्षिण भारत की पुण्यभूमि हैदराबाद में अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार के सौजन्य से आयोजित 108 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ एवं दीपयज्ञ का आयोजन अत्यंत श्रद्धा और भव्यता के साथ संपन्न हुआ। इस दौरान पूरे क्षेत्र में सनातन धर्म की गंगा अपनी पूरे रंग में बही। महायज्ञ में पहुंचे देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति युवा आइकॉन डॉ चिन्मय पण्ड्या ने दक्षिण भारत के गाँव गाँव में सनातन संस्कृति भारतीय संस्कृति को पहुंचाने के लिए लोगों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जब जीवन में सद्गुरु आते हैं, तो जीवन में आमूल-चूल परिवर्तन हो जाता है। तब नरेंद्र विवेकानंद बन जाते हैं और राष्ट्र के जागरण के लिए गुरुदेव के बताए सूत्रों पर स्वयं को समर्पित कर देते हैं। उन्होंने राष्ट्र निर्माण के लिए गुरुदेव द्वारा बताए जीवन-मंत्र आत्मवत् सर्वभूतेषु को आत्मसात करने की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. पंड्या ने आगामी जनवरी माह में होने वाले गायत्री परिवार की संस्थापिका माता भगवती देवी शर्मा जी की जन्मशताब्दी कार्यक्रम में भागीदारी करने हेतु आमंत्रित किया और इस युग परिवर्तन अभियान से जुडऩे का आह्वान किया।
इस पावन अवसर पर दक्षिण भारत के प्रसिद्ध आध्यात्मिक संत चिन्ना जीयर स्वामी जी महायज्ञ में भागीदारी करने अपने सहयोगियों के साथ पहुंचे। उन्होंने भारतीय संस्कृति के विस्तार में जुटे गायत्री परिवार के कार्यों की सराहना की। इस अवसर पर सनातन संस्कृति के संवाहक डॉ चिन्मय पण्ड्या ने आध्यात्मिक संत चिन्ना जीयर स्वामी जो गायत्री माता के चित्र आदि भेंटकर सम्मानित किया, तो वहीं स्वामी जी ने भी डॉ चिन्मय पण्ड्या जी को चादर ओढ़ाकर अपना सम्मान प्रकट किया। यज्ञायोजन में तेलंगाना एवं आसपास के राज्यों से हजारों श्रद्धालुओं ने सहभागिता की और सामूहिक प्रार्थना के माध्यम से राष्ट्र, समाज तथा मानवता के कल्याण की भावना व्यक्त की।






