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हरदोई के हरपालपुर सीएचसी में अव्यवस्था के आरोप, वार्ड बॉय के भरोसे चल रहा अस्पताल

मरीजों को लगातार किया जा रहा रेफर

जन एक्सप्रेस/हरदोई: हरदोई जनपद के हरपालपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) इन दिनों गंभीर आरोपों के चलते सुर्खियों में है। स्थानीय लोगों और मरीजों का कहना है कि अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से अव्यवस्थित हो चुकी हैं और यहां डॉक्टरों के बजाय वार्ड बॉय और बाहरी कर्मचारियों के भरोसे इलाज किया जा रहा है। इस स्थिति ने मरीजों की जान को खतरे में डाल दिया है और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, अस्पताल में डॉक्टरों की तैनाती होने के बावजूद उनकी सक्रिय भूमिका नजर नहीं आती। मरीजों का आरोप है कि उपचार, सलाह और यहां तक कि रेफर करने जैसे महत्वपूर्ण निर्णय भी वार्ड बॉय स्तर के कर्मचारी लेते हैं। इससे न केवल चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि मरीजों के साथ गंभीर लापरवाही भी हो रही है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सीएचसी हरपालपुर अब “रेफर सेंटर” बनकर रह गया है। मामूली बीमारियों और सामान्य प्रसव जैसे मामलों में भी मरीजों को जिला अस्पताल या निजी अस्पतालों में भेज दिया जाता है। इससे गरीब और ग्रामीण परिवारों को आर्थिक रूप से भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, साथ ही उन्हें अनावश्यक मानसिक तनाव और परेशानियों का सामना भी करना पड़ रहा है।

सूत्रों की मानें तो अस्पताल में प्राइवेट और संविदा कर्मियों का प्रभाव काफी बढ़ गया है। आरोप है कि यही कर्मचारी तय करते हैं कि किस मरीज को कहां रेफर करना है। कई मामलों में यह भी कहा जा रहा है कि कथित कमीशनखोरी के चलते मरीजों को निजी अस्पतालों की ओर भेजा जा रहा है। विशेष रूप से प्रसव के मामलों में यह प्रवृत्ति अधिक देखने को मिल रही है।

ग्रामीणों ने आशा बहुओं पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि आशा कार्यकर्ता कई बार मरीजों पर निजी अस्पतालों में जाने का दबाव बनाती हैं, जबकि सरकारी अस्पताल में ही सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इससे यह संदेह और गहरा हो गया है कि कहीं यह पूरा मामला कमीशनखोरी से जुड़ा तो नहीं है।

लोगों का सवाल है कि जब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव और इलाज की पर्याप्त सुविधाएं मौजूद हैं, तो मरीजों को बाहर क्यों भेजा जा रहा है? यदि अस्पताल में डॉक्टर मौजूद हैं, तो उनकी भूमिका आखिर क्या है? इन सवालों के जवाब अब तक स्पष्ट नहीं हो पाए हैं, जिससे क्षेत्रीय जनता में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इस व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है। मरीजों की जान से खिलवाड़ किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

क्षेत्रीय लोगों ने उच्च अधिकारियों से मांग की है कि हरपालपुर सीएचसी की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। लोगों ने यह भी मांग की है कि अस्पताल में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए, ताकि मरीजों को बेहतर और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

यह मामला न केवल हरपालपुर बल्कि पूरे जनपद की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर क्या कदम उठाता है और आम जनता को कब तक राहत मिलती है।

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