तीसरे दिन भी ठप रही केदारनाथ यात्रा: हाईवे बंद, पांच हजार से अधिक यात्री सोनप्रयाग में फंसे
1100 यात्रियों का जंगल के रास्ते रेस्क्यू, मुनकटिया में 70 मीटर सड़क बहने से हालात गंभीर

जन एक्सप्रेस रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड में हो रही लगातार बारिश और भूस्खलन ने केदारनाथ यात्रा को तीसरे दिन भी पूरी तरह ठप कर दिया है। गौरीकुंड हाईवे पर मुनकटिया के पास भारी मलबा और बोल्डरों के चलते मार्ग अब तक नहीं खुल पाया है। सोनप्रयाग में 5000 से अधिक यात्री हाईवे खुलने का इंतजार कर रहे हैं, जबकि एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों ने अब तक 1100 से अधिक यात्रियों को जंगल के रास्ते रेस्क्यू कर सुरक्षित निकाला है।
मुनकटिया में हाईवे पूरी तरह क्षतिग्रस्त, 70 मीटर सड़क बह गई
हाईवे अवरुद्ध होने की वजह बुधवार को मुनकटिया में भारी भूस्खलन है, जहां करीब 70 मीटर सड़क का हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। नेशनल हाईवे अथॉरिटी द्वारा पाकलैंड मशीनों और जेसीबी की मदद से मलबा हटाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन लगातार पहाड़ी से मलबा गिरने के कारण राहत कार्य में रुकावट आ रही है।एनएच लोनिवि के अधिशासी अभियंता ओंकार पांडेय ने बताया कि अधिकारी मौके पर तैनात हैं और मार्ग को खोलने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास जारी हैं।
केदारनाथ से लौट रहे यात्रियों का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
जो यात्री केदारनाथ दर्शन कर लौट रहे थे, उन्हें एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें वैकल्पिक जंगल मार्ग से सोनप्रयाग पहुंचा रही हैं।
सुबह 10 बजे तक 800 यात्रियों को सुरक्षित निकाला गया। देर शाम तक 250 और यात्रियों को रेस्क्यू कर लाया गया। कुल मिलाकर तीन दिनों में 2179 यात्रियों को अब तक निकाला जा चुका है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि रेस्क्यू अभियान लगातार चल रहा है और सभी यात्रियों की सुरक्षा प्राथमिकता है।एसडीआरएफ उप निरीक्षक आशीष डिमरी ने भी कहा कि पुलिस, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें मिलकर यात्रियों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचा रही हैं।
सोनप्रयाग में ठहरे यात्रियों की संख्या 5000 पार
हाईवे बंद होने के चलते सोनप्रयाग में करीब 5000 से अधिक श्रद्धालु फंसे हुए हैं। प्रशासन द्वारा भोजन, पानी और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था की जा रही है, लेकिन लगातार बारिश और हाईवे की स्थिति को देखते हुए चिंता बनी हुई है।
अभी नहीं मिली आगे यात्रा की अनुमति
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सोनप्रयाग से आगे केदारनाथ की ओर किसी भी यात्री को नहीं जाने दिया जाएगा जब तक कि मार्ग पूरी तरह से सुरक्षित न हो जाए। जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग और एनएच विभाग स्थिति पर लगातार निगरानी रखे हुए हैं।






