मुख्यमंत्री का दौरा सिर्फ दिखावा: कांग्रेस नेता पंकज मिश्र का तीखा हमला
तुलसी जयंती पर भी हिंदू-मुसलमान खोजने निकले सीएम" — पंकज मिश्र का तंज

जन एक्सप्रेस चित्रकूट: मुख्यमंत्री के चित्रकूट दौरे को कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष पंकज मिश्र ने सख्त लहजे में आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि “मुख्यमंत्री का यह दौरा जनता के साथ एक राजनीतिक मज़ाक था। न विकास की बात, न समाधान की चिंता — सिर्फ भाषण, प्रचार और धर्म की राजनीति।”
तुलसी जयंती के पावन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को लेकर भी उन्होंने कहा, “जहां तुलसीदास जैसे संत का नाम लिया जाना चाहिए था, वहां मुख्यमंत्री हिंदू-मुस्लिम की राजनीति घुसेड़ते नजर आए। तुलसी बाबा को भी राम और अकबर की राजनीतिक लड़ाई में खींच लिया गया।”
“दौरा नहीं, ड्रामा था”: मिश्र का व्यंग्य प्रहार
पंकज मिश्र ने कहा, “मुख्यमंत्री ने यहां कोई नया ऐलान नहीं किया। वही घिसा-पिटा भाषण, और वही हवाई बातें। उल्टा हाल ये रहा कि उनकी पार्टी के अपने ही निष्ठावान कार्यकर्ता कार्यक्रम स्थल से दूर फटक भी नहीं पाए। नारा लगाने और फोटो खिंचवाने वाले चमचे जरूर इधर-उधर उछलते रहे।”
जमीनी हकीकत: बहते पुल, धंसती सड़कें, रोता किसान
उन्होंने तंज कसा कि “पुल उद्घाटन से पहले बह जाते हैं, सड़कें धंस जाती हैं और स्वास्थ्य सेवाएं खंडहर में बदल चुकी हैं। कोई देखने वाला नहीं। स्वास्थ्य मंत्री तो मानो पिकनिक मनाकर लौट गए।”
आगे उन्होंने किसानों की हालत पर बात करते हुए कहा, “अन्ना गोवंशों ने किसानों का जीना दूभर कर दिया है। सड़कों पर ये छुट्टा जानवर अब ट्रैफिक पुलिस का काम भी संभालने लगे हैं। सरकार को इस पर शर्म आनी चाहिए।”
जल जीवन मिशन में घोटाले का बम
मिश्र ने आरोप लगाया कि जिले में अब तक का सबसे बड़ा घोटाला जल जीवन मिशन में हुआ है। “पाइप नहीं पहुंचे, पानी नहीं आया, लेकिन भुगतान फुल हुआ। जिम्मेदार चुप्पी का चादर ओढ़े बैठे हैं।”
“टॉफी दो, वोट लो” की राजनीति पर निशाना
उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री बच्चों को टॉफी बांट कर शिक्षा के भविष्य की बात कर गए, लेकिन तिरहार जैसे पिछड़े क्षेत्रों को कोई ठोस सौगात नहीं मिली। यह दौरा सिर्फ आरएसएस और साधु-संतों को प्रसन्न करने की योजना थी, आम जनता को ठेंगा दिखाने जैसा।”
बेरोजगारी और पलायन पर चुप्पी क्यों?
उन्होंने तीखा सवाल उठाया कि “जब मुख्यमंत्री चित्रकूट आए, तो पलायन पर चुप क्यों रहे? बुंदेलखंड में नौजवान बेरोजगारी से त्रस्त हैं, लेकिन भाषण में इस पर एक शब्द तक नहीं कहा गया। सिर्फ प्रचार और झूठे विकास का गुणगान होता रहा।”
“तुलसी बाबा को भी राजनीति में घसीटा गया”
आखिर में मिश्र ने दुख जताते हुए कहा, “तुलसी बाबा सिर्फ तुलसी थे। उन्हें राम और अकबर के राजनीतिक टकराव में घसीटना एक महान संत का अपमान है। मुख्यमंत्री को ऐसे धार्मिक अवसर पर राजनीति से बचना चाहिए था। पंकज मिश्र का ये हमला सत्ता पक्ष के लिए चेतावनी है या सिर्फ चुनावी शोर — ये आने वाले वक्त में तय होगा। मगर इतना तय है कि चित्रकूट की जनता अब वादों नहीं, बदलाव की मांग कर रही है।






