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चित्रकूट में नशे का नंगा नाच! कर्वी से लेकर राजापुर तक गांजा माफियाओं का तांडव, पुलिस बनी तमाशबीन!

जन एक्सप्रेस चित्रकूट (हेमनारायण द्विवेदी): उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जहां एक ओर अपराध और भ्रष्टाचार पर लगाम कसने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर जनपद चित्रकूट में नशे का कारोबार बेलगाम होता जा रहा है। कर्वी कोतवाली के अंतर्गत बस स्टैंड परिसर में खुलेआम गांजा बिक रहा है, और पुलिस प्रशासन मौन साधे बैठा है।स्थानीय सूत्रों की मानें तो कर्वी कोतवाली क्षेत्र में कम से कम दस ठिकानों पर गांजे की खुलेआम बिक्री हो रही है। आरोप यह भी है कि इस अवैध कारोबार की आड़ में पुलिस की जेबें गर्म हो रही हैं। “कोतवाल साहब की मेहरबानी नहीं होती तो गांजे की ये दुकानें कब की बंद हो जातीं,” ऐसा कहना है इलाके के निवासियों का।

गांजे का ये ज़हर अब सिर्फ कर्वी तक सीमित नहीं रहा। राजापुर, मऊ और पहाड़ी थाना क्षेत्र भी इस नशे की गिरफ्त में हैं। थानों के ठीक सामने और सरकारी कार्यालयों के इर्द-गिर्द गांजे के पैकेट धड़ल्ले से बिक रहे हैं। सवाल यह उठता है कि जब सबकुछ इतनी साफ़गोई से हो रहा है तो क्या पुलिस को कुछ दिखाई नहीं देता, या फिर आंखों पर ‘हरि चढ़ावा’ का पर्दा पड़ा है?

गांजे की गिरफ्त में युवा पीढ़ी
शहर के युवा तेजी से नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। स्कूल-कॉलेजों के बाहर, सार्वजनिक स्थलों और गली-मोहल्लों में गांजा पीते नाबालिग और किशोर दिखना आम हो गया है। स्थानीय लोग भय और नाराज़गी के बीच जीने को मजबूर हैं, लेकिन प्रशासन कान में तेल डाले बैठा है।

कौन दे रहा है संरक्षण?
सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर नशे के इस काले कारोबार को संरक्षण कौन दे रहा है? क्या पुलिस की मिलीभगत से ही गांजा माफिया इतने बेखौफ हैं? अगर नहीं, तो फिर अब तक कोई सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

योगी सरकार की साख पर सवाल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की पहचान अपराधियों पर बुलडोज़र चलाने की रही है। लेकिन चित्रकूट जैसे धार्मिक और शांत जिलों में इस तरह के नशे का तांडव सरकार की साख को बट्टा लगा रहा है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि गांजा बेचने वालों पर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई हो, और यदि स्थानीय पुलिस असहाय या शामिल पाई जाती है तो CB-CID या STF जैसी एजेंसियों से जांच कराई जाए।

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