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“कानपुर की देवी… जिनका श्राप बना श्रापितों की आशा!”

जन एक्सप्रेस / कानपुर:  कानपुर की देवी… जिनका श्राप बना श्रापितों की आशा कभी घर की बेटियाँ थीं… आज देवी बनकर विराजती हैं। कानपुर की धरती पर आस्था का वो ऐतिहासिक केन्द्र… जहां एक लोककथा श्रद्धा में तब्दील हो गई।  आज शारदीय नवरात्रि का  दिन है, और कानपुर का बारा देवी मंदिर एक बार फिर श्रद्धालुओं की भीड़ से गूंज उठा है।”

कहते हैं कि जब घर में बेटी का दर्द कोई नहीं समझता, तो वो देवी बन जाती है। लोककथा के अनुसार, करीब 1700 साल पहले 12 बहनें पिता से अनबन के बाद घर से निकलकर जूही नहर के किनारे आ बसी थीं। वहां वे पत्थर की मूर्तियों में बदल गईं… और उनके पिता भी श्रापवश पत्थर बन गए। बस तभी से इस जगह का नाम पड़ा — ‘बारा देवी’ यानी बारह देवियाँ!”

यहां हर भक्त यही मानकर आता है कि जो बेटियाँ एक बार रो पड़ीं, वो अब दुनिया का दुःख हरने वाली ‘माँ’ बन चुकी हैं

सुबह की पहली आरती से लेकर रात की अंतिम घंटी तक — यहाँ हर कोने से जय माता दी की गूंज सुनाई देती है। मान्यता है कि जो भक्त चुनरी बांधते हैं, उनकी हर मनोकामना देवी जरूर पूरी करती हैं। और मनोकामना पूरी हो जाए… तो भक्त मां को विशेष श्रृंगार कराते हैं।”

इस नवरात्रि, अनुमान है कि हर दिन यहां 1 लाख से ज़्यादा श्रद्धालु पहुंच रहे हैं — सिर्फ कानपुर नहीं, लखनऊ, हमीरपुर, फतेहपुर और दिल्ली तक से लोग यहां खींचे चले आते हैं!”

कुछ साल पहले तक यहां भक्ति की आंधी में कई खतरनाक प्रथाएं भी चलती थीं — भक्त मुंह में लोहे की छड़ आर-पार कर मंदिर में प्रवेश करते थे, कोई जीभ काटकर चढ़ावे में देता था। लेकिन अब प्रशासन की सख्ती और जागरूकता से इन कुप्रथाओं पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। अब भक्ति सुरक्षित भी है और सच्ची भी!”

मंदिर में प्रवेश के लिए चार द्वार हैं — पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण। सबसे ज्यादा भीड़ लगती है पूर्वी द्वार पर, जहां से श्रद्धालु नवरात्रि में प्रवेश करते हैं। मंदिर के बाहर लगा मेला बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों के लिए भी आस्था के साथ-साथ आनंद का केंद्र बन जाता है — झूले, स्टॉल्स और प्रसाद की खुशबू माहौल को और भी भक्तिमय बना देती है।”

यह मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं — यह एक पीढ़ियों से चली आ रही उम्मीद की परंपरा है

बारा देवी सिर्फ एक मंदिर नहीं — यह उस लोककथा का प्रमाण है, जो दिखाती है कि बेटी अगर ठुकरा दी जाए… तो देवी बनकर लौटती है। इस नवरात्रि, जन एक्सप्रेस आपको याद दिलाना चाहता है — श्रद्धा वही होती है, जो प्रेम से हो… और देवी वही होती हैं, जो हर मन को छू जाए।”

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