सकरौहा की सड़कें बनीं कीचड़ का दरिया! स्वच्छता अभियान के दावों की खुली पोल — अधिकारी चैन से कुर्सी पर, जनता परेशान
मानिकपुर ब्लॉक के सकरौहा गांव में दुर्गम सड़कों से जनता बेहाल, स्कूली बच्चों और मरीजों का निकलना हुआ मुश्किल — प्रधान शहर में, सचिव मौन, और अधिकारी बेफिक्र

जन एक्सप्रेस चित्रकूट (हेमनारायण हेमू): जनपद चित्रकूट के मानिकपुर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत सकरौहा में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। गांव की सड़कें कीचड़ से पट चुकी हैं — हालत यह है कि पैदल निकलना तो दूर, अगर किसी मरीज को अस्पताल ले जाना पड़े तो लोगों की दुर्गति तय है। स्कूली बच्चों को रोजाना इस कीचड़ भरे रास्ते से गुजरना पड़ता है, उनके कपड़े रोज गंदे हो जाते हैं, लेकिन प्रशासन की नींद अब तक नहीं टूटी। गांव के लोगों का आरोप है कि ग्राम पंचायत के प्रधान चुनाव जीतने के बाद शहर में शिफ्ट हो गए, अब न गांव की खबर लेते हैं, न जनता की सुनते हैं। वहीं ग्राम सचिव और मानिकपुर बीडीओ भी अपनी आरामदायक कुर्सी पर चैन से बैठे हैं।
ग्रामीणों ने कई बार शिकायतें कीं, लेकिन सुनवाई के नाम पर केवल आश्वासन मिला।योगी सरकार के स्वच्छता अभियान और संचारी रोग नियंत्रण के सारे दावे यहां बेमानी साबित हो रहे हैं। जगह-जगह पानी भरा है, मच्छरों का बोलबाला है, और गंदगी का आलम ऐसा कि लोगों का गांव में रहना मुश्किल हो गया है।ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि क्या गांव में रहना अब गुनाह हो गया है? अधिकारी जनता के टैक्स पर ऐश कर रहे हैं, लेकिन गांव की दुर्दशा पर किसी की नजर नहीं।“कागजों में गांव चमक रहा है, हकीकत में कीचड़ में डूबा है” — यही है सकरौहा की सच्चाई।






