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मनरेगा नाम परिवर्तन के विरोध से पहले NSUI शहर अध्यक्ष अमन सिन्हा नजरबंद

जन एक्सप्रेस/जौनपुर: केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना के नाम में प्रस्तावित परिवर्तन के विरोध में NSUI द्वारा किए जाने वाले शांतिपूर्ण प्रदर्शन से पहले ही प्रशासन ने एहतियातन कार्रवाई करते हुए NSUI जौनपुर के शहर अध्यक्ष अमन सिन्हा को उनके आवास पर नजरबंद कर दिया। इस कार्रवाई के बाद छात्र और युवा संगठनों में नाराजगी देखी जा रही है।

NSUI का कहना है कि यह कदम वाराणसी में प्रस्तावित शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन से पहले उठाया गया, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। संगठन का आरोप है कि बिना किसी उकसावे के इस तरह की प्रशासनिक कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।

NSUI नेताओं का कहना है कि मनरेगा योजना केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि करोड़ों ग्रामीणों, श्रमिकों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए रोजगार और अधिकार की गारंटी रही है। ऐसे में योजना के नाम या स्वरूप में बदलाव जैसे विषयों पर सरकार को व्यापक जनसंवाद करना चाहिए।

“शांतिपूर्ण विरोध हमारा संवैधानिक अधिकार” – अमन सिन्हा

नजरबंदी के दौरान NSUI शहर अध्यक्ष अमन सिन्हा ने कहा,
“लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रत्येक नागरिक का संविधान प्रदत्त अधिकार है। इस प्रकार की प्रशासनिक कार्रवाई से विचारों को दबाया नहीं जा सकता। NSUI संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के तहत अपनी आवाज़ उठाती रहेगी।”

उन्होंने कहा कि छात्र और युवा देश की नीतियों से सीधे प्रभावित होते हैं और उन्हें अपनी बात रखने से रोका जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।

NSUI ने सरकार से की पुनर्विचार की मांग

NSUI ने केंद्र सरकार से मांग की है कि मनरेगा से जुड़े किसी भी निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए और छात्र-युवा संगठनों को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए। संगठन ने स्पष्ट किया कि वह भविष्य में भी संविधान के दायरे में रहते हुए जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाता रहेगा।

NSUI ने लोकतंत्र, संविधान और जनकल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि वह संवाद और शांतिपूर्ण आंदोलनों के माध्यम से अपनी आवाज़ आगे भी बुलंद करता रहेगा।

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