जौनपुर: जिला महिला अस्पताल की सुरक्षा भगवान भरोसे! मुख्य गेट ‘गायब’, प्रशासन बेखबर

जन एक्सप्रेस/ जौनपुर: क्या जौनपुर का स्वास्थ्य विभाग किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि जिले के सबसे संवेदनशील जिला महिला अस्पताल (District Women Hospital, Jaunpur) की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त नज़र आ रही है। अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार का एक गेट लंबे समय से गायब है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी गहरी नींद में सोए हुए हैं।
सुरक्षा में बड़ी सेंध: खुला निमंत्रण दे रही लापरवाही
महिला अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर, जहाँ दिन-रात सैकड़ों गर्भवती महिलाओं, प्रसूताओं और नवजात शिशुओं की मौजूदगी रहती है, वहाँ मुख्य गेट का न होना सुरक्षा में एक बड़ी चूक है।
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असामाजिक तत्वों का डर: गेट न होने के कारण कोई भी बाहरी व्यक्ति या असामाजिक तत्व बिना किसी रोक-टोक के अस्पताल परिसर में प्रवेश कर सकता है।
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आवारा पशुओं का जमावड़ा: मुख्य द्वार खुला होने से अस्पताल के अंदर आवारा जानवरों का घुसना आम बात हो गई है, जिससे संक्रमण और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।
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तीमारदारों में भय: मरीजों के परिजनों का आरोप है कि रात के समय सुरक्षा का खतरा और भी बढ़ जाता है।
सीएमएस और प्रशासनिक अधिकारियों की चुप्पी
हैरानी की बात यह है कि अस्पताल की CMS (Chief Medical Superintendent) और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को इस समस्या की जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई मरम्मत कार्य नहीं कराया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह लापरवाही केवल एक गेट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली को भी उजागर करती है।
“अस्पताल अब एक खुला मैदान बन चुका है। हमें डर लगता है कि कोई बच्चा चोरी न हो जाए या कोई अनहोनी न हो जाए, लेकिन साहब लोग तो एसी कमरों से बाहर ही नहीं निकलते।” – एक पीड़ित तीमारदार
क्या CMO लेंगे इस पर संज्ञान?
अब सवाल यह है कि क्या मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) जौनपुर इस मामले में दखल देंगे? क्या भ्रष्टाचार या लापरवाही की फाइलों के बीच इस टूटे गेट की मरम्मत हो पाएगी? अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करना केवल गेट लगाना नहीं, बल्कि वहाँ आने वाले मरीजों के विश्वास को सुरक्षित करना भी है।






