
जन एक्सप्रेस /नई टिहरी
नई टिहरी में प्रस्तावित कोटी कॉलोनी–जाख–डोबरा पर्यटन सड़क निर्माण परियोजना को लेकर अब ग्रामीणों की चिंताएं खुलकर सामने आने लगी हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए शनिवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल की अध्यक्षता में एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रभावित गांवों के लोगों ने अपनी समस्याएं सीधे प्रशासन के सामने रखीं।
इस बैठक में ग्राम जाख, तिवाड़गांव और पलास के दर्जनों ग्रामीण शामिल हुए। ग्रामीणों ने सड़क निर्माण के लिए किए जा रहे भूमि और परिसंपत्तियों के सर्वे को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराईं। उनका कहना था कि सर्वे टीम द्वारा उनके खेत, मकान और अन्य संपत्तियों का सही और निष्पक्ष मूल्यांकन नहीं किया गया है। ऐसे में उन्हें मिलने वाला मुआवजा कम हो सकता है, जो उनके साथ अन्याय होगा।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कई स्थानों पर सर्वे बिना पूरी जानकारी और पारदर्शिता के किया गया, जिससे वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ सकी। इस पर जिलाधिकारी ने सभी शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए एक-एक ग्रामीण की बात ध्यानपूर्वक सुनी और भरोसा दिलाया कि किसी के साथ भी अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन भी लोगों को अपने भूमि या संपत्ति के सर्वे पर आपत्ति है, वे अपनी शिकायतें लिखित रूप में प्रस्तुत करें। इस अपील के बाद कुल 14 ग्रामीणों ने अपनी लिखित आपत्तियां प्रशासन को सौंपीं।
इन शिकायतों को आधार बनाते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे सभी आपत्तियों की पुनः जांच करें और आवश्यकतानुसार दोबारा सर्वे कर रिपोर्ट जल्द से जल्द प्रस्तुत करें। उन्होंने यह भी कहा कि सर्वे कार्य में पूरी पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी प्रभावित व्यक्ति को नुकसान न हो।
जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल ने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता है कि विकास कार्यों के साथ-साथ लोगों के अधिकारों की भी रक्षा की जाए। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सर्वे में किसी भी प्रकार की लापरवाही पाई जाती है, तो जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस बैठक में लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता केएस नेगी, एसडीएम टिहरी कमलेश मेहता, पीएमजीएसवाई के अधिशासी अभियंता अविनाश सैनी, बीना सेमवाल सहित कई विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा प्रभावित गांवों के काश्तकार भी बड़ी संख्या में शामिल हुए।
बैठक का मुख्य उद्देश्य यही रहा कि सड़क निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विकास कार्य के दौरान ग्रामीणों के हितों की अनदेखी न हो। प्रशासन ने यह संकेत भी दिया कि आगे की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से की जाएगी, ताकि सभी प्रभावितों को उनका उचित हक मिल सके।
अब देखना होगा कि प्रशासन के निर्देशों के बाद दोबारा सर्वे में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं और क्या ग्रामीणों की चिंताओं का समाधान हो पाता है या नहीं। फिलहाल, इस बैठक के बाद ग्रामीणों को न्याय मिलने की उम्मीद जरूर जगी है।






