मोरी में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का धरना 16वें दिन भी जारी, सरकार के खिलाफ तेज हुआ आंदोलन
मोरी में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का धरना 16वें दिन भी जारी।

उत्तराखंड के विकास खंड मोरी में आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों और सहायिकाओं का धरना-प्रदर्शन लगातार 16वें दिन भी जारी है। अपनी लंबित मांगों को लेकर बड़ी संख्या में महिलाएं तहसील परिसर मोरी में एकत्रित हो रही हैं और सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन कर रही हैं। शुक्रवार को भी सैकड़ों कार्यकर्त्रियों ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की और नारेबाजी करते हुए जल्द से जल्द समस्याओं के समाधान की मांग उठाई।
धरना स्थल पर मौजूद कार्यकर्त्रियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रही हैं, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। यही वजह है कि उनका आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने साफ तौर पर चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को जल्द नहीं माना गया, तो वे आंदोलन को और उग्र रूप देने के लिए मजबूर होंगी।
आंगनबाड़ी संघ की मोरी ब्लॉक अध्यक्ष मेनका चौहान ने बताया कि कार्यकर्त्रियों और सहायिकाओं को उनके कार्य के अनुरूप मानदेय नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि इतनी कम आय में परिवार का पालन-पोषण करना बेहद कठिन हो गया है। महंगाई के इस दौर में वर्तमान मानदेय उनके जीवन यापन के लिए पर्याप्त नहीं है, जिससे वे आर्थिक संकट का सामना कर रही हैं।
संघ की प्रमुख मांगों में सबसे अहम मांग मासिक मानदेय में वृद्धि की है। कार्यकर्त्रियों ने सरकार से मांग की है कि उनका मासिक मानदेय बढ़ाकर 18,000 रुपये किया जाए। इसके अलावा उन्होंने राज्य सरकार से 190 रुपये प्रतिदिन की वृद्धि किए जाने की मांग भी रखी है। साथ ही केंद्र सरकार को 150 रुपये प्रतिदिन की बढ़ोतरी का प्रस्ताव भेजने की भी अपील की गई है।
इसके अलावा, कार्यकर्त्रियों ने सेवानिवृत्ति से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया है। उनका कहना है कि रिटायरमेंट के समय उनके खातों से अनावश्यक कटौती की जाती है, जो पूरी तरह गलत है। उन्होंने मांग की है कि 300 रुपये की मासिक कटौती को तुरंत बंद किया जाए, ताकि उन्हें आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े।
धरना दे रही महिलाओं ने बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली को लेकर भी अपनी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इस प्रणाली को लागू करने से उनके कार्य में अनावश्यक दबाव बढ़ेगा और कई तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। इसलिए उन्होंने मांग की है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों को बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली से न जोड़ा जाए।
धरने में शामिल महिलाओं का कहना है कि वे अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष कर रही हैं, लेकिन यदि सरकार उनकी अनदेखी करती रही, तो वे आंदोलन को और व्यापक रूप देने के लिए बाध्य होंगी। उन्होंने सरकार से अपील की है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए और जल्द से जल्द सकारात्मक निर्णय लिया जाए।
इस पूरे आंदोलन में आंगनबाड़ी संघ की मोरी ब्लॉक अध्यक्ष मेनका चौहान के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्त्रियां और सहायिकाएं लगातार हिस्सा ले रही हैं। उनके साथ स्थानीय महिलाएं भी समर्थन में खड़ी नजर आ रही हैं, जिससे आंदोलन को और मजबूती मिल रही है।
अब देखना होगा कि सरकार इस आंदोलन पर क्या रुख अपनाती है और आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों की मांगों को लेकर कब तक कोई ठोस फैसला लिया जाता है।






