
जन एक्सप्रेस/ हरिद्वार: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मोबाइल की लगातार बजती घंटियां, काम का दबाव, पारिवारिक जिम्मेदारियां और भविष्य की चिंताएं लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे समय में गायत्री चालीसा का नियमित पाठ तनाव कम करने और मानसिक शांति प्राप्त करने का एक सरल माध्यम बनकर सामने आ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिदिन मात्र 9 मिनट तक गायत्री चालीसा का भावपूर्वक पाठ करने से मन की चंचलता कम होती है और विचारों में स्थिरता आती है। जब व्यक्ति मंत्रों के शब्दों और उनके भावार्थ पर ध्यान केंद्रित करता है, तो मन भटकने के बजाय एक बिंदु पर टिकने लगता है। इससे मानसिक तनाव में कमी और आंतरिक शांति का अनुभव हो सकता है।
ध्यान और मंत्र-जप का प्रभाव
देव संस्कृति विश्वविद्यालय तथा ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान से जुड़े अध्यात्म एवं योग विशेषज्ञों के अनुसार, ध्यान और मंत्र-जप के दौरान सांसों की गति संतुलित होने लगती है। इससे शरीर की विश्राम प्रणाली सक्रिय होती है, जिसके परिणामस्वरूप तनाव कम होने और मानसिक संतुलन बेहतर होने में सहायता मिल सकती है।
विभिन्न ध्यान और माइंडफुलनेस अध्ययनों में भी यह पाया गया है कि नियमित ध्यान अभ्यास मानसिक दबाव को कम करने और एकाग्रता बढ़ाने में सहायक हो सकता है।
आध्यात्मिक दृष्टि से गायत्री चालीसा का महत्व
आध्यात्मिक मान्यता के अनुसार गायत्री चालीसा केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि सद्बुद्धि, सकारात्मक सोच और आत्मिक जागरण की प्रार्थना है। इसके नियमित पाठ से व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा क्रोध, तनाव और नकारात्मक विचारों में कमी आने का अनुभव हो सकता है।
युगऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य का प्रसिद्ध सूत्र “हम सुधरेंगे, युग सुधरेगा” इसी आत्मपरिवर्तन की भावना को व्यक्त करता है।
कैसे करें 9 मिनट का अभ्यास?
- किसी शांत स्थान पर बैठें।
- मोबाइल फोन को साइलेंट मोड पर रखें।
- तीन बार भावपूर्वक गायत्री महामंत्र का जप करें।
- इसके बाद गायत्री चालीसा का पाठ करें।
- शब्दों और भावों पर ध्यान केंद्रित रखें।
- सांसों को सहज, धीमा और गहरा रखें।
- पाठ पूर्ण होने के बाद कुछ क्षण शांत बैठें।
यह पूरी प्रक्रिया लगभग 9 मिनट में पूरी हो जाती है।
युवाओं और गृहस्थों के लिए उपयोगी अभ्यास
डिजिटल तनाव से जूझ रहे युवाओं, नौकरीपेशा लोगों तथा पारिवारिक जिम्मेदारियों में व्यस्त गृहस्थों के लिए यह अभ्यास मानसिक संतुलन बनाए रखने का एक सरल उपाय माना जाता है। नियमित अभ्यास से एकाग्रता, कार्यक्षमता और नींद की गुणवत्ता में सुधार का अनुभव किया जा सकता है।
हालांकि, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि गंभीर मानसिक या शारीरिक स्वास्थ्य समस्याओं के लिए चिकित्सकीय सलाह और उपचार का विकल्प नहीं है। इसे एक आध्यात्मिक एवं ध्यानात्मक अभ्यास के रूप में अपनाया जा सकता है।




