
जन एक्सप्रेस/ उत्तरकाशी: संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र (CCRT) द्वारा गुवाहाटी (असम) में 22 जुलाई से 11 अगस्त तक आयोजित ओरिएंटेशन (बेसिक फाउंडेशन) कार्यशाला में उत्तरकाशी जिले के शिक्षकों को प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने का गौरवपूर्ण अवसर मिला। इस सहभागिता के माध्यम से उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया।
कार्यशाला का उद्देश्य देश के विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं, कला, संगीत, नृत्य, हस्तशिल्प तथा सांस्कृतिक मूल्यों से शिक्षकों को परिचित कराना और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान, राष्ट्रीय एकता तथा सांस्कृतिक समन्वय की भावना को मजबूत करना है।
प्रशिक्षण के दौरान उत्तरकाशी के प्रतिभागी शिक्षकों ने जिले की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान का प्रभावशाली परिचय दिया। उन्होंने उत्तराखंड के प्रमुख लोकनृत्य, लोकगीत, पारंपरिक वेशभूषा, लोकवाद्य, पर्व-त्योहार, रीति-रिवाज और लोककलाओं की विशेषताओं को विस्तार से प्रस्तुत किया।
इसके साथ ही प्रतिभागियों ने देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विविधता, हिमालयी जीवनशैली, धार्मिक एवं आध्यात्मिक परंपराओं, स्थानीय हस्तशिल्प तथा लोकसंस्कृति की विशिष्ट पहचान से देशभर से आए शिक्षकों को अवगत कराया।
कार्यशाला में उत्तरकाशी की सहभागिता को जिले के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यह पहल न केवल स्थानीय संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में सहायक है, बल्कि शिक्षकों के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।






