उत्तराखंडनई टिहरी

नई टिहरी: हर्बल टी व्यवसाय से आत्मनिर्भर बनीं प्रियंका बिष्ट, सालाना 6.40 लाख रुपये की आय

जन एक्सप्रेस/ नई टिहरी: विकासखंड थौलधार के धरवाल गांव की रहने वाली प्रियंका बिष्ट ने यह साबित कर दिया है कि सही मार्गदर्शन, वित्तीय सहयोग और दृढ़ संकल्प के दम पर ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं। आज प्रियंका अपने सफल हर्बल टी व्यवसाय के जरिए न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं।

स्वयं सहायता समूह से मिली नई पहचान

कुछ समय पहले तक प्रियंका बिष्ट का जीवन घर, खेती और पशुपालन तक सीमित था। परिवार की आय सीमित होने के कारण स्वरोजगार के अवसर भी कम थे। करीब दो वर्ष पहले उन्होंने ‘वेदावी स्वयं सहायता समूह’ से जुड़कर अपने जीवन की नई शुरुआत की।

समूह की बैठकों में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के माध्यम से उन्हें स्वरोजगार की विभिन्न योजनाओं और अवसरों की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने हर्बल टी निर्माण को अपने व्यवसाय के रूप में चुना।

सरकारी सहयोग से शुरू किया व्यवसाय

प्रियंका को व्यवसाय शुरू करने के लिए स्वयं सहायता समूह और उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से वित्तीय सहायता मिली। उन्हें रिवॉल्विंग फंड, सामुदायिक निवेश निधि (CIF) तथा बैंक ऋण का लाभ मिला, जिससे उन्होंने अपना उद्यम स्थापित किया।

शुरुआती चुनौतियों के बाद उनकी मेहनत रंग लाई और आज उनका हर्बल टी व्यवसाय लगातार प्रगति कर रहा है।

सालाना 6.40 लाख रुपये की आय

वर्तमान में प्रियंका बिष्ट का उद्यम करीब 800 किलोग्राम हर्बल टी का उत्पादन कर रहा है। इस व्यवसाय से उनकी वार्षिक आय बढ़कर लगभग 6.40 लाख रुपये हो गई है।

आर्थिक मजबूती के साथ-साथ उनके परिवार की सामाजिक स्थिति में भी सकारात्मक बदलाव आया है और अब वे परिवार के महत्वपूर्ण निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

‘हर्बल टी वाली दीदी’ और ‘लखपति दीदी’ के नाम से पहचान

प्रियंका की सफलता केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं रही। आज वे अपने क्षेत्र में ‘हर्बल टी वाली दीदी’ और ‘लखपति दीदी’ के नाम से जानी जाती हैं।

उन्होंने 20 से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार से जोड़ा है और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया है।

महिला सशक्तिकरण का सफल उदाहरण

प्रियंका बिष्ट की सफलता यह दर्शाती है कि स्वयं सहायता समूह और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन जैसी योजनाएं केवल आर्थिक सहायता ही नहीं देतीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आत्मविश्वास, सम्मान और नई पहचान भी प्रदान करती हैं।

डीआरडीए परियोजना निदेशक ज्योति ने कहा कि उत्तराखंड सरकार महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को मजबूत बनाकर महिलाओं को स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ा जा रहा है।

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