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एमडीएम खाते का अंतर सुधारने के नाम पर 2500 रुपये मांगने का आरोप

प्रधानाध्यापक ने बीएसए से की लिखित शिकायत, विभागीय कार्यप्रणाली पर उठे सवाल; शिक्षकों को लगातार कार्यालय बुलाकर बैठाने और सुविधा शुल्क मांगने का भी आरोप

विवेक तिवारी

जन एक्सप्रेस।जौनपुर :- बेसिक शिक्षा विभाग में मध्याह्न भोजन व्यवस्था से जुड़ा एक मामला सामने आने के बाद विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। सुइथाकला विकासखंड के कंपोजिट विद्यालय मित्तूपुर के प्रधानाध्यापक अमरनाथ ने मध्याह्न भोजन खाते की सूचना में आए अंतर को सुधारने के नाम पर 2500 रुपये मांगने का आरोप लगाते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारी जौनपुर को लिखित प्रार्थना पत्र देकर जांच और कार्रवाई की मांग की है।

प्रधानाध्यापक की शिकायत के अनुसार विभाग की ओर से मध्याह्न भोजन खाते से संबंधित सूचना मांगी गई थी। उन्होंने आय-व्यय पंजिका के आधार पर खाद्यान्न एवं अतिरिक्त पोषण की धनराशि को छोड़कर शेष राशि का 60 प्रतिशत जूनियर और 40 प्रतिशत प्राइमरी स्तर के लिए निर्धारित किया। इसी क्रम में 25 फरवरी 2026 को जूनियर, प्राइमरी एवं अन्य मद के लिए अलग-अलग चेक जारी किए गए।

शिकायत में बताया गया है कि संबंधित दुकानदार को क्रमशः 25,074 रुपये, 26,176 रुपये और 25,820 रुपये के चेक दिए गए। आरोप है कि इन चेकों का भुगतान 31 मार्च 2026 के बाद अप्रैल में हुआ। इसके चलते 31 मार्च की स्थिति में खाते के शेष धन में अंतर दिखाई देने लगा। प्रधानाध्यापक का आरोप है कि इसी अंतर को ठीक कराने के नाम पर सुइथाकला विकासखंड में मध्याह्न भोजन का कार्य देख रहे प्रवीण चतुर्वेदी ने उनसे 2500 रुपये की मांग की।

कार्यालय में घंटों बैठाने का भी आरोप

मामले को लेकर प्रधानाध्यापक ने अधिकारियों से सवाल किया है कि विपरीत परिस्थितियों में विद्यालय का काम करने वाले शिक्षकों को यदि विभागीय कार्य के नाम पर लगातार दो-तीन दिन कार्यालय बुलाकर घंटों बैठाया जाए और कथित रूप से सुविधा शुल्क की मांग की जाए, तो क्या यह उचित है? प्रधानाध्यापक ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

शिकायत के बाद अब विभागीय जांच पर निगाहें टिकी हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठ सकती है। वहीं, दूसरी ओर शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

बहरहाल, जन एक्सप्रेस ने मामले की जानकारी लेने के लिए खंड शिक्षा अधिकारी, सुइथाकला से उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया। फोन की घंटी बजती रही, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। अब देखना यह होगा कि बेसिक शिक्षा विभाग इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेता है और कथित धन मांग तथा खाते के अंतर की जांच किस स्तर पर कराई जाती है।

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