
जन एक्सप्रेस/विकासनगर: रविवार को विकासनगर में कैबिनेट मंत्री खजान दास के कैंप कार्यालय/आवास के बाहर चकराता क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं ने धरना दिया। कार्यकर्ताओं ने समाज कल्याण विभाग से जुड़ी योजनाओं में कथित अनदेखी का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि समाज कल्याण विभाग की एसीपी/एससीपी तथा एसटी और जनजाति से जुड़ी योजनाओं, जिनमें जनजाति बहुल चकराता क्षेत्र के लिए स्पेशल कंपोनेंट प्लान के तहत करीब 12 करोड़ रुपये की योजनाएं और टेंडर शामिल बताए जा रहे हैं, में भाजपा कार्यकर्ताओं की अपेक्षा विपक्ष से जुड़े लोगों को अधिक लाभ दिया जा रहा है। कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि करीब 80 प्रतिशत लाभ ऐसे लोगों को मिल रहा है, जिनसे भाजपा राजनीतिक रूप से मुकाबला करती है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
धरने में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चौहान ने नाराजगी जताते हुए कहा कि कार्यकर्ताओं को अपनी ही सरकार के मंत्री के खिलाफ बैठना पड़ रहा है। उनके मुताबिक यह केवल एक दिन का आक्रोश नहीं बल्कि लंबे समय से चली आ रही नाराजगी का परिणाम है। उन्होंने चकराता में पार्टी की चुनावी स्थिति का उल्लेख करते हुए योजनाओं में कथित प्राथमिकता को लेकर सवाल उठाए।
पूर्व मंत्री मूरत राम शर्मा ने भी योजनाओं को लेकर आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष से जुड़े कार्यकर्ताओं की योजनाओं को स्वीकृति दी गई है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि जिन योजनाओं को लेकर आपत्ति है, उनकी समीक्षा कर उन्हें निरस्त किया जाए। साथ ही चेतावनी दी गई कि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर पूरा मामला उनके सामने रखा जाएगा।
धरने में गीता राम गौड़, कमलेश भट्ट, राजाराम शर्मा, नीरज शर्मा, शांति राम डोभाल और प्रभाकर जोशी समेत कई स्थानीय नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि चकराता क्षेत्र में पार्टी कार्यकर्ताओं की लंबे समय से अनदेखी की जा रही है और योजनाओं के वितरण में उन्हें अपेक्षित हिस्सेदारी नहीं मिल रही है।
वहीं, कैबिनेट मंत्री खजान दास ने संपर्क किए जाने पर कहा कि योजनाएं जनहित को ध्यान में रखते हुए स्वीकृत की गई हैं। उन्होंने कहा कि उनके पास पूरे प्रदेश की जिम्मेदारी है और हर क्षेत्र का ध्यान रखना पड़ता है। मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल से बातचीत करने और मामले की समीक्षा का आश्वासन भी दिया।
अब कार्यकर्ताओं की प्रस्तावित मुख्यमंत्री से मुलाकात पर नजर रहेगी। सोमवार को होने वाली बातचीत में योजनाओं को लेकर उठाई गई आपत्तियों और कार्यकर्ताओं की मांगों पर सरकार का रुख स्पष्ट हो सकता है। फिलहाल चकराता क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ताओं का यह विरोध स्थानीय संगठन और सरकार के बीच योजनाओं के लाभ को लेकर सामने आए मतभेद के रूप में देखा जा रहा है।