फर्जी दस्तावेज से जमीन हड़पने के खेल में एसडीएम के आदेश पर मुकदमा दर्ज
2024 के पुराने आदेश को शून्य घोषित कर दर्ज हुआ मुकदमा

जन एक्सप्रेस /प्रतापगढ़ : जिले की तहसील सदर में फर्जी साक्ष्यों के आधार पर राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी करने वाले भू-माफियाओं और उनके मददगार सरकारी तंत्र पर प्रशासन ने कड़ा शिकंजा कसा है। उपजिलाधिकारी सदर के आदेश पर कोतवाली नगर पुलिस ने प्रतिवादी समेत उन राजस्व कर्मियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया है, जिन्होंने साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर गलत तरीके से आदेश पारित कराया था। हालांकि आदेश के बाद मुकदमा दर्ज होने में लगभग डेढ़ महीने का समय लग गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मामला सदर तहसील के सगरा गांव की गाटा संख्या 456 से जुड़ा है। न्यायालय उपजिलाधिकारी सदर में ‘चन्द्रप्रकाश बनाम चन्द्रनाथ’ के बीच उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 38(2) के तहत वाद विचाराधीन था। आरोप है कि प्रतिवादी चन्द्रनाथ ने कूटरचित ( फर्जी ) साक्ष्य प्रस्तुत कर 21 सितम्बर 2024 को अपने पक्ष में एक आदेश पारित करा लिया था।प्रकरण के बाबत गाटा संख्या 456 के खातेदार इन्द्रदेव तिवारी ने जिलाधिकारी शिवसहाय अवस्थी से पूरे मामले की शिकायत की। जब मामले की पुनः समीक्षा की गई, तो वर्तमान उपजिलाधिकारी सदर ने पाया कि पूर्व में जारी आदेश पूरी तरह फर्जी दस्तावेजों पर आधारित था। न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए 19 फरवरी 2026 को पुराने आदेश को शून्य ( निरस्त ) घोषित कर दिया। साथ ही इस धोखाधड़ी में शामिल प्रतिवादी और साक्ष्य गढ़ने में संलिप्त राजस्व कर्मचारियों व अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया। न्यायालय के रीडर रामकुमार रावत द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया है। इस कार्यवाही से तहसील परिसर और राजस्व विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। पुलिस अब उन कड़ियों को जोड़ रही है जिससे यह पता चल सके कि किन-किन कर्मचारियों ने इस फर्जीवाड़े में मदद की थी।






