
जन एक्सप्रेस/पौड़ी: जनपद में सुरक्षित मातृत्व और जच्चा-बच्चा के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) डॉ. शिव मोहन शुक्ला ने बताया कि जिले में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को समय रहते पहचानने के लिए व्यापक योजना तैयार की गई है।
अभियान की मुख्य विशेषताएं और रणनीतियां
1. वार रूम से 24×7 मॉनिटरिंग
गर्भवती महिलाओं और हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (HRP) की ट्रैकिंग के लिए जनपद स्तर पर एक वार रूम स्थापित किया गया है।
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यहाँ से महिलाओं की चिकित्सकीय जांच, अल्ट्रासाउंड और टीकाकरण की जानकारी ली जा रही है।
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आवश्यकतानुसार विशेषज्ञों द्वारा फोन पर ही परामर्श दिया जा रहा है।
2. ब्लॉक वार नोडल अधिकारियों की तैनाती
प्रसव केंद्रों की निगरानी के लिए जिला स्तर पर विशेष टीम गठित की गई है:
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अपर मुख्य चिकित्साधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाकर ब्लॉक वार जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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टीम में सभी जिला समन्वयक शामिल हैं, जो गृह प्रसव (Home Delivery) वाले क्षेत्रों में जाकर लोगों को जागरूक करेंगे।
3. जनप्रतिनिधियों का सहयोग और जमीनी स्तर पर निगरानी
अभियान को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग स्थानीय निकायों की मदद लेगा:
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घर-घर जाकर गर्भवती महिलाओं की मॉनिटरिंग की जाएगी।
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ग्राम प्रधानों और क्षेत्र पंचायत सदस्यों का सहयोग लेकर ग्रामीणों को अस्पतालों में प्रसव कराने हेतु प्रेरित किया जाएगा।
अन्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य प्राथमिकताएं
सीएमओ ने स्पष्ट किया कि विभाग केवल प्रसव तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य गंभीर मुद्दों पर भी सघन काम कर रहा है:
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एनीमिया नियंत्रण: महिलाओं और बच्चों में खून की कमी को दूर करने के लिए विशेष प्रयास।
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टीबी उन्मूलन: जनपद में 100 दिवसीय टीबी मुक्त अभियान का संचालन।
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PCPNDT एक्ट: लिंग चयन रोकने हेतु अधिनियम का सख्ती से पालन।
सीएमओ की अपील
“जच्चा-बच्चा के स्वास्थ्य की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए सभी परिवारों से अपील है कि वे अनिवार्य रूप से संस्थागत प्रसव कराएं और सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करें।” — डॉ. शिव मोहन शुक्ला, सीएमओ पौड़ी






