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BJP के आरोप पर कांग्रेस नेता सिद्धारमैया की सफाई

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बेंगलुरु: भाजपा के ताबड़तोड़ हमले के बाद यह भी कहा कि उन्होंने किसी भी तरह से धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाई है। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री ने भोजन के चुनाव के अधिकार पर जोर देते हुए इसे “गैर-मुद्दा” करार दिया है।

इससे पहले 18 अगस्त को सिद्धारमैया ने कोडलीपेट के बसवेश्वर मंदिर में कथित तौर पर मांसाहारी भोजन करने के बाद प्रवेश किया था।

बेंगलुरु में मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए सिद्धारमैया ने कहा, “क्या मांस खाना एक मुद्दा है? यह एक व्यक्तिगत भोजन की आदत है। मैं शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह का खाना खाता हूं। यह मेरी आदत है। कुछ लोग मांस नहीं खाते हैं, यह उनकी भोजन आदत है।”

उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि भगवा पार्टी के पास और कोई काम नहीं है और देश में चल रहे प्रमुख मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए विवाद पैदा करने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने कहा, “मेरे हिसाब से तो इसमें कोई बात ही नहीं है। बहुत लोग बिना मांस खाए चले जाते हैं और कई खाकर चले जाते हैं। कई जगहों पर देवताओं को मांस चढ़ाया जाता है। सच कहूं तो मैंने उस दिन मांस नहीं खाया था। मैंने वही कहा जो मैंने किया था। मैंने केवल बांस शूट करी और ‘अक्की रोटी’ खाई।”

राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता सिद्धारमैया ने रविवार को अपने बचाव में कहा था, ”वह मांसाहारी हैं और यह उनकी खाने की एक आदत है।” उन्होंने सवाल किया कि क्या भगवान ने मंदिर जाने से पहले कहा है कि क्या खाना चाहिए और क्या नहीं।

इससे पहले एक वरिष्ठ विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल ने सिद्धारमैया को चुनौती दी और कहा, “यदि आप (सिद्धारमैया) में हिम्मत है तो सूअर का मांस खाएं और मस्जिद जाएं।

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