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पिथौरागढ़ के ‘एप्पल मैन’ मनोज खड़ायत नौकरी छोड़ आधुनिक सेब बागवानी से लिखी सफलता की नई कहानी

जन एक्सप्रेस/पिथौरागढ़ :- निजी नौकरी छोड़कर खेती को करियर बनाना आसान फैसला नहीं होता, लेकिन पिथौरागढ़ जिले के नाकोट क्षेत्र के सिंतोली (धूरा तोक) निवासी युवा किसान मनोज खड़ायत ने यह चुनौती स्वीकार की और आज पूरे क्षेत्र में ‘एप्पल मैन’ के नाम से अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। आधुनिक तकनीक से सेब की खेती कर वे न केवल अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं, बल्कि अन्य किसानों को भी पौधे उपलब्ध कराकर स्वरोजगार की नई राह दिखा रहे हैं।

करीब दस वर्ष पहले मनोज ने खेती की शुरुआत की। शुरुआती 7–8 वर्षों तक उन्होंने सब्जी उत्पादन किया, लेकिन गांव तक सड़क और मंडी की सुविधा नहीं होने के कारण उत्पाद को बाजार तक पहुंचाना मुश्किल हो गया। बढ़ती परिवहन लागत और विपणन की चुनौतियों के चलते उन्हें सब्जी खेती छोड़नी पड़ी।

इसके बाद उन्होंने बागवानी को अपना भविष्य बनाया। वर्ष 2016 में आधुनिक सेब उत्पादन का प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने हिमाचल प्रदेश और चाफी स्थित इंडो डच नर्सरी से डिलीशियस और गाला किस्म के पौधे मंगवाए। नाकोट क्षेत्र की अनुकूल जलवायु ने उनके प्रयासों को सफल बनाया और धीरे-धीरे उनका बगीचा फलदार पेड़ों से भर गया।

वर्तमान में मनोज की 10 नाली भूमि में लगभग 500 सेब के पौधे लगे हैं। इनमें से करीब 200 पेड़ फल देना शुरू कर चुके हैं। इस वर्ष उनके बगीचे से 5 से 6 क्विंटल सेब उत्पादन का अनुमान है। बाकी पौधों के फल देने के बाद उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है।

इन दिनों उनके बगीचे में लाल-लाल सेबों की बहार है। स्थानीय लोग सीधे उनके बगीचे पहुंचकर ताजे सेब खरीद रहे हैं। डिलीशियस किस्म के सेब ₹200 से ₹250 प्रति किलोग्राम और गाला किस्म ₹300 प्रति किलोग्राम तक बिक रही है।

अब दूसरे किसानों को भी दे रहे पौधे

मनोज अब केवल सेब उत्पादक नहीं हैं, बल्कि उन्होंने स्वयं पौधे तैयार करना भी शुरू कर दिया है। वे क्षेत्र के किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौधे उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर व्यावसायिक बागवानी को बढ़ावा मिल रहा है और ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर बन रहे हैं।

विदेशी स्टोन फ्रूट पर भी कर रहे हैं काम

मनोज ने बताया कि वे वर्तमान में प्लम (आलूबुखारा), खुमानी, अखरोट और पर्सिमन जैसी विदेशी व्यावसायिक स्टोन फ्रूट प्रजातियों पर भी कार्य कर रहे हैं। उनका उद्देश्य पहाड़ की जलवायु के अनुरूप उच्च मूल्य वाली फल फसलों को बढ़ावा देना है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो सके।

सड़क बने तो मिलेगा बड़ा बाजार

मनोज का कहना है कि उनके बगीचे तक सड़क सुविधा नहीं होने से परिवहन पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है। यदि सड़क संपर्क बेहतर हो जाए तो उत्पादन को बड़े बाजारों तक पहुंचाना आसान होगा और किसानों को अधिक लाभ मिल सकेगा।

“पहाड़ में अवसर की कमी नहीं, सही तकनीक और धैर्य जरूरी”

मनोज खड़ायत का कहना है कि नौकरी छोड़ने के फैसले पर शुरुआत में कई लोगों ने सवाल उठाए, लेकिन मेहनत, धैर्य और आधुनिक तकनीक के सहारे आज उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। उनका मानना है कि यदि युवा वैज्ञानिक तरीके से बागवानी अपनाएं तो पहाड़ में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पलायन जैसी समस्या को भी काफी हद तक रोका जा सकता है।

रिपोर्ट: पंकज कुमार पाण्डेय

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