प्रेस की आज़ादी की रखवाली में प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया
महिला पत्रकारों की सुरक्षा और मीडिया की स्वतंत्रता के लिए PCI सख्त रुख में

जन एक्सप्रेस नई दिल्ली: मीडिया की स्वतंत्रता और महिला पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने एक बार फिर अपने दायित्व और अधिकारों की स्पष्ट रूपरेखा प्रस्तुत की है। PCI न केवल मीडिया की स्वतंत्रता की रक्षा करता है, बल्कि पत्रकारिता के उच्च नैतिक मानकों को बनाए रखने के लिए भी सक्रिय रूप से कार्य करता है। प्रेस काउंसिल के पास किसी भी मामले में स्वतः संज्ञान (Suo-motu) लेने का अधिकार है। यदि किसी महिला पत्रकार को प्रेस कॉन्फ्रेंस, इवेंट या किसी अन्य पत्रकारिता गतिविधि से रोका जाता है, तो PCI संबंधित संस्था या सरकार से जवाब मांग सकता है।
महिला पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है PCI
आज के दौर में महिला पत्रकारों को कई बार भेदभाव या असमान व्यवहार का सामना करना पड़ता है। PCI ऐसे मामलों में संबंधित पक्षों से जवाब तलब कर सकता है, गवाहों को बुला सकता है, सबूत एकत्र कर सकता है, और आवश्यक रिकॉर्ड की जांच कर सकता है। दोषी पाए जाने पर PCI निंदा या सार्वजनिक चेतावनी भी जारी कर सकता है।
सरकारी हस्तक्षेप पर भी रखी जाती है नज़र
यदि सरकार या किसी अन्य संस्था द्वारा प्रेस की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप किया जाता है, तो प्रेस काउंसिल उस पर भी सार्वजनिक टिप्पणी कर सकता है और संबंधित प्राधिकरण को अपनी सिफारिशें भेज सकता है। यह भारत में मीडिया की आज़ादी को सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है। प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया का मुख्य उद्देश्य न केवल पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा करना है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि पत्रकारिता समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाए। निष्पक्ष, स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता को बढ़ावा देना PCI की प्राथमिकताओं में शामिल है।
ऐसे समय में जब मीडिया पर सामाजिक, राजनीतिक और डिजिटल दबाव बढ़ता जा रहा है, PCI की यह भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। खासकर महिला पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा और प्रेस की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने के लिए प्रेस काउंसिल का सक्रिय होना लोकतंत्र की मजबूती का संकेत है।






