विद्यालय प्रबंधक की घोषणा कोरोना कॉल की नहीं ली जाएगी फीस

उत्तर प्रदेश
सच दिखाने की जिद...

बलरामपुर । “कुछ करने का जज्बा हो तो फिर कोई कार्य मुश्किल नहीं है । ऐसा कुछ करके दिखाया है बलरामपुर जिला मुख्यालय के डिवाइन पब्लिक स्कूल के प्रबंध तंत्र  ने ।” जनपद बलरामपुर जिला मुख्यालय स्थित डिवाइन पब्लिक स्कूल के प्रबंधक आशीष उपाध्याय ने तमाम विषम परिस्थितियों के बीच भी अपने विद्यालय में अध्ययनरत तमाम छात्र छात्राओं के अभिभावकों को यथासंभव सहयोग  प्रदान करने का प्रयास जारी रखते हुए वर्तमान शिक्षा सत्र की पूरी फीस माफ करने की घोषणा की है । उन्होंने यह भी घोषणा किया है कि यदि उनके विद्यालय में अध्यनरत कोई भी छात्र छात्रा वर्तमान कक्षा में ही अगले शिक्षा सत्र में भी पढ़ना चाहेगा तो उससे फीस नहीं लिया जाएगा ।
                  बुधवार को डिवाइन पब्लिक स्कूल परिसर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान विद्यालय के प्रबंधक आशीष उपाध्याय ने जानकारी दिया कि उन्होंने कोरोना काल के कारण खुद आर्थिक संकट का सामना करते हुए अभिभावकों को पूरी तरह से शुल्क की छूट प्रदान कर रखी है। उन्होंने बर्तमान शिक्षा सत्र शुरू होने के बाद कोरोना शुरू होते ही 6 महीने की शुल्क न लेने की घोषणा की थी । अब जब करोना कॉल 6 महीने से अधिक बढ़ गया तो उन्होंने दूसरी बार घोषणा करते हुए कहा है कि जो छात्र छात्राएं उनके विद्यालय में अध्ययनरत हैं उनसे पूरे शिक्षा सत्र का शुल्क नहीं लिया जाएगा। इतना ही नहीं अध्यनरत छात्र-छात्राओं में जो वर्तमान कक्षा में ही पुनः अध्ययन करना चाहेंगे उनसे अगले वर्ष की भी शुल्क नहीं लिया जाएगा । साथ ही पुराने पाठ्यपुस्तक को पढ़ने की सुविधा भी प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि 1 अप्रैल से शुरू होने वाले अगले शिक्षा सत्र में अगले कक्षा में प्रवेश लेने पर ही फीस देना होगा । उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विद्यालय के कक्षा के लिए पाठ्य पुस्तकों को बदला नहीं जाएगा, ताकि अभिभावकों के ऊपर किसी प्रकार का कोई आर्थिक बोझ ना पड़ने पाए। विद्यालय के प्रबंधक द्वारा कोरोना वॉरियर्स के रूप में संघर्ष करने वाले पत्रकारों को भी उपहार देकर सम्मानित किया गया । इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य अलका उपाध्याय, फाउंडर सरोज उपाध्याय, अध्यापिका कंचन श्रीवास्तव, रूपम मिश्रा, सुमन मिश्रा, जूली पांडे, सौम्या ओझा, शुभी तिवारी, कृष्णा गुप्ता व शुभम श्रीवास्तव भी मौजूद थे ।

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