
जन एक्सप्रेस/हरिद्वार: विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक केंद्र शांतिकुंज में चल रहे नौ दिवसीय साधना शिविर के दौरान साधकों को भक्ति और सेवा का मार्ग दिखाया गया। शिविर को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता श्याम बिहारी दुबे ने हनुमान जी के आदर्शों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक सच्चे शिष्य की असली पहचान उसके भीतर छिपी हनुमान जैसी निष्काम भक्ति और पूर्ण समर्पण है।
साधना और भक्ति का मूल मंत्र
दुबे ने रामायण की चौपाइयों का उदाहरण देते हुए भक्ति की सूक्ष्म परिभाषा समझाई। उन्होंने कहा:
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अहंकार का त्याग: साधना तभी सार्थक होती है जब साधक अपने अहंकार को छोड़कर गुरु और ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा रखता है।
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अनुशासन और विनम्रता: साधना का वास्तविक उद्देश्य केवल जप नहीं, बल्कि जीवन में अनुशासन, विनम्रता और सेवा भाव को उतारना है।
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आदर्श उदाहरण: हनुमान जी का जीवन निष्ठा और सेवा का वह उच्चतम पैमाना है, जिससे हर साधक को प्रेरणा लेनी चाहिए।
देशभर के साधकों का गायत्री अनुष्ठान
इस शिविर में भारत के विभिन्न राज्यों से आए सैकड़ों साधक और साधिकाएं हिस्सा ले रहे हैं। वर्तमान में सभी प्रतिभागी गायत्री महामंत्र के लघु अनुष्ठान में संलग्न हैं। शिविर की दिनचर्या बेहद अनुशासित है, जिसमें निम्नलिखित गतिविधियाँ शामिल हैं:
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प्रातःकालीन ध्यान और आत्मबोध की साधना।
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मंत्र जप और यज्ञ-हवन।
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सत्संग एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शन।
शिविर का व्यापक उद्देश्य
इस नौ दिवसीय आयोजन का मुख्य लक्ष्य साधकों के भीतर आध्यात्मिक जागरूकता पैदा करना और उन्हें राष्ट्र निर्माण के लिए तैयार करना है। शांतिकुंज का वातावरण इस समय पूर्णतः भक्तिमय और प्रेरणादायक बना हुआ है, जिससे प्रतिभागियों में एक नई ऊर्जा और सकारात्मक जीवन शैली के प्रति उत्साह देखा जा रहा है।







