
जन एक्सप्रेस/हरिद्वार: देव संस्कृति विश्वविद्यालय (DSVV) में ‘धार्मिक अध्ययन के विकास’ विषय पर एक भव्य अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में भारत सहित दुनिया के 37 देशों के प्रतिनिधियों ने शिरकत की, जहाँ धर्म, विज्ञान और मानवीय मूल्यों के समन्वय पर गंभीर चर्चा हुई।
1. आध्यात्मिक चेतना और मानवीय मूल्य अनिवार्य
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि वर्तमान वैश्विक समाज में विभिन्न धार्मिक परंपराओं के बीच संवाद और आपसी समझ की सख्त जरूरत है। उन्होंने युगऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा:
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शिक्षा का असली उद्देश्य केवल ज्ञानार्जन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना का विकास है।
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एकता, समता, ममता और सुचिता ही विश्व की विविध परंपराओं को जोड़ने वाले सूत्र हैं।
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DSVV ऐसे आयोजनों के माध्यम से वैश्विक स्तर पर सांस्कृतिक समन्वय का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।
2. पोलैंड की शैक्षणिक परंपरा और भारतविद्या
मुख्य वक्ता के रूप में पोलैंड के जॉन पॉल द्वितीय कैथोलिक विश्वविद्यालय से आए रेव. डॉ. फिलिप जोजेफ क्राउजे ने धार्मिक अध्ययन के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि:
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उनके विश्वविद्यालय में 1918 से ही भारतविद्या (Indology) को विशेष स्थान दिया गया है।
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धार्मिक अध्ययन का लक्ष्य किसी एक वैश्विक धर्म की स्थापना करना नहीं, बल्कि विभिन्न संस्कृतियों के आध्यात्मिक अनुभवों को समझना है।
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आस्था और तर्क (Faith and Reason) एक ही सत्य के दो पहलू हैं।
3. 37 देशों की सहभागिता
इस संगोष्ठी में ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, जर्मनी, कनाडा, सीरिया, यूक्रेन, उज़्बेकिस्तान, जापान, रोमानिया और ईरान सहित 37 देशों के शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने भाग लिया। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग (International Academic Collaboration) को लेकर भी सार्थक चर्चा हुई।






