उत्तर प्रदेशलखनऊ

नगर निगम चुनाव: कार्यकारिणी के छह पदों पर दावेदारी का घमासान

भाजपा-सपा में टकराव तेज, अवैध प्लॉटिंग और निर्माण पर प्रशासन की नजर, गोमतीनगर में तौसीफ अहमद की बिल्डिंग सील

जन एक्सप्रेस/लखनऊ : नगर निगम कार्यकारिणी के छह रिक्त पदों को लेकर सियासी गर्मी चरम पर है। भाजपा और सपा में जोरदार खींचतान चल रही है। इन पदों के लिए करीब 30 पार्षदों ने दावेदारी ठोक दी है, जबकि कांग्रेस मैदान में नजर नहीं आ रही है। चुनाव 26 जून को होने हैं, जिसके लिए जोड़तोड़ और लॉबिंग जारी है।

भाजपा में 5 सीटों पर 20 दावेदार
नगर निगम कार्यकारिणी के 12 में से छह सदस्य एक जून को दो साल का कार्यकाल पूरा कर रिटायर हो चुके हैं। इनमें पांच भाजपा और एक सपा से थे। भाजपा इन सभी पांच सीटों पर फिर से कब्जा जमाना चाहती है, लेकिन पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती उम्मीदवार तय करने की है, क्योंकि 20 से अधिक पार्षद मैदान में हैं।

भाजपा से दावेदारी कर रहे प्रमुख नामों में अलीगंज के पृथ्वी गुप्ता, फैजुल्लागंज तृतीय के प्रदीप शुक्ला टिंकू, भवानीगंज की रीता राय, लालकुआं के सुशील तिवारी पम्मी, हिंद नगर के सौरभ सिंह मोनू, सरोजनी नगर द्वितीय के राम नरेश रावत, ऐशबाग के संदीप शर्मा, जियामऊ के अमित चौधरी, काल्विन कॉलेज के प्रमोद सिंह राजन, पेपर मिल कॉलोनी के राजेश सिंह गब्बर, तिलक नगर के राजीव बाजपेई और मनकामेश्वर के रंजीत सिंह शामिल हैं।

सपा की एक सीट, 10 दावेदार
सपा एक ही सीट जीत सकती है, मगर उसके यहां भी दावेदारों की भीड़ लगी है। पार्टी को एक नाम तय करने में पसीने छूट रहे हैं। सपा के संभावित उम्मीदवारों में यावर हुसैन रेशू (जगदीश चंद्र बोस वार्ड), शफीकुर्रहमान चचा (रानी लक्ष्मीबाई वार्ड), ममता रावत (भरवारा मल्हौर), राम नरेश चौरसिया (कन्हैया माधवपुर), मोहम्मद हलीम (गोलागंज), मुस्कान भारती (इब्राहिम द्वितीय), सुभाष चंद्र (अंबेडकर नगर) और मोहम्मद नदीम (कदम रसूल) प्रमुख हैं।

अवैध निर्माण पर कार्रवाई, गोमतीनगर में सीलिंग
चुनावी गहमा-गहमी के बीच नगर निगम की कार्रवाई भी जारी है। गोसाईंगंज के दुलारपुर गांव में दो बीघा और जीवन की तीन बीघा जमीन पर अवैध प्लॉटिंग की जा रही थी। वहीं गोमतीनगर विस्तार के सेक्टर-6 में तौसीफ अहमद द्वारा कराए जा रहे अवैध निर्माण को नगर निगम ने सील कर दिया है।

अब देखना यह है कि सियासी उठापटक में कौन पार्षद कार्यकारिणी की कुर्सी तक पहुंचता है और प्रशासन अवैध निर्माण पर कितना सख्त रुख अपनाता है।

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