उत्तराखंड की महिला किसान उद्यमी: स्थानीय ज्ञान से वैश्विक लक्ष्यों तक

जन एक्सप्रेस/ गढ़वाल: ग्रामीण प्रौद्योगिकी विभाग और मौल्यार फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष के अवसर पर एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘उत्तराखंड की महिला किसान उद्यमी: स्थानीय ज्ञान से वैश्विक लक्ष्यों तक सतत आजीविका का मार्ग’ रहा।
संगोष्ठी के मुख्य बिंदु:
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पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक नवाचार: कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने पहाड़ी महिलाओं की कड़ी मेहनत की सराहना की। उन्होंने ‘एक परिवार-एक उत्पाद’ की अवधारणा को बढ़ावा देते हुए पारंपरिक कृषि को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का आह्वान किया।
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बाजार पहुंच और बुनियादी ढांचा: प्रो. ए.के. बागी ने इस बात पर जोर दिया कि पहाड़ी उत्पादों के संरक्षण के साथ-साथ बाजार तक पहुंच के लिए एक मजबूत परिवहन व्यवस्था अनिवार्य है।
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डिजिटल क्रांति: कृषि विज्ञान संकायाध्यक्ष प्रो. ए.के. नेगी और ममता पांगती ने डिजिटल प्लेटफॉर्म (जैसे डिजिटल सहेली) के महत्व को रेखांकित किया, ताकि स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार मिल सके।
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पहाड़ की रीढ़: वक्ताओं ने महिलाओं को पहाड़ की अर्थव्यवस्था की ‘रीढ़’ बताते हुए उन्हें केवल खेती तक सीमित न रहकर उद्यमिता (Entrepreneurship) अपनाने के लिए प्रेरित किया।
“विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद उत्तराखंड की महिलाएं कृषि क्षेत्र को जीवित रखे हुए हैं। अब समय है कि उनके स्थानीय ज्ञान को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालकर आर्थिक सशक्तिकरण की ओर बढ़ा जाए।”






