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रांची में हैं गरीबों का फाइव स्टार होटल’, 30 रुपये में भरपेट खाना, 50-60 रुपये में मुर्गा-भात

जन एक्सप्रेस /लखनऊ :-  झारखंड की राजधानी रांची में इन दिनों एक सस्ता और देसी स्वाद वाला ढाबा लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। शहर में जहां महंगे रेस्तरां और कैफे तेजी से बढ़ रहे हैं, वहीं रिंग रोड के संग्रामपुर इलाके में स्थित एक साधारण झोपड़ीनुमा ढाबा अपनी कम कीमत और भरपेट खाने के लिए लोगों का ध्यान खींच रहा है। स्थानीय लोग और सोशल मीडिया पर चर्चा करने वाले इसे ‘गरीबों का फाइव स्टार होटल’ तक कह रहे हैं।

इस ढाबे की खासियत यहां मिलने वाला सस्ता और घरेलू स्वाद वाला खाना है। बताया जा रहा है कि यहां करीब 30 रुपये में वेज थाली मिलती है, जिसमें चावल, दाल, सब्जी, अचार और सलाद शामिल हैं। वहीं मुर्गा-भात की कीमत करीब 50 से 60 रुपये बताई जा रही है। हालांकि कुछ वायरल वीडियो में इसे 30 रुपये के मुर्गा-भात के रूप में भी प्रचारित किया गया है।

30 रुपये में भरपेट खाना

रिपोर्ट्स के मुताबिक ढाबे में वेज थाली में चावल, दाल और सब्जी की पर्याप्त मात्रा मिलती है। चावल और दाल को अनलिमिटेड बताए जाने से कम बजट में भरपेट भोजन करने वालों के लिए यह जगह खास बन गई है।

मुर्गा-भात की थाली में चावल और दाल के साथ चिकन के कुछ पीस दिए जाते हैं। कीमत अन्य रेस्टोरेंट और ढाबों के मुकाबले काफी कम होने के कारण यहां मजदूरों, ट्रक चालकों, छात्रों और आसपास के लोगों की भीड़ देखने को मिलती है।

लकड़ी के चूल्हे पर बनता है खाना

ढाबे का माहौल बेहद साधारण है। झोपड़ीनुमा जगह पर लकड़ी के चूल्हे पर खाना तैयार किया जाता है। देसी मसालों से तैयार भोजन को ताजा परोसे जाने की बात कही जा रही है।

ग्राहकों के मुताबिक यहां के खाने में घर जैसा स्वाद मिलता है। यही वजह है कि साधारण सुविधाओं के बावजूद लोग यहां खाना खाने पहुंच रहे हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बढ़ी चर्चा

रिंग रोड के संग्रामपुर इलाके में कई छोटे-बड़े ढाबे हैं, लेकिन कम कीमत में भोजन उपलब्ध कराने के कारण यह ढाबा सोशल मीडिया पर खास चर्चा में आ गया है। वायरल वीडियो और स्थानीय लोगों की चर्चाओं के बाद फूड लवर्स और दूसरे इलाकों से आने वाले लोग भी यहां पहुंचने लगे हैं।

बताया जा रहा है कि शुरुआत में यहां ग्राहकों की संख्या कम थी, लेकिन धीरे-धीरे ढाबे की पहचान बढ़ती गई। अब रोजाना बड़ी मात्रा में चावल और चिकन तैयार किया जाता है।

ट्रक ड्राइवर से लेकर छात्र तक पहुंच रहे

ढाबे में आने वाले लोगों में ट्रक ड्राइवर, मजदूर, छात्र और आम परिवार शामिल हैं। कम कीमत में पेट भर खाना मिलने के कारण यह जगह उन लोगों के लिए खास राहत मानी जा रही है, जिनके लिए बाहर खाना रोजाना महंगा पड़ सकता है।

बैठने की व्यवस्था भी सामान्य है। कहीं झोपड़ी के अंदर तो कहीं खुले स्थान पर टेबल-कुर्सियां लगाई गई हैं। इसके बावजूद खाने की कीमत और स्वाद के कारण ग्राहक यहां पहुंच रहे हैं।

महंगाई के बीच सस्ता खाना बना आकर्षण

बाहर खाने की बढ़ती कीमतों के बीच 30 रुपये में भरपेट भोजन की उपलब्धता लोगों को आकर्षित कर रही है। झारखंड में सरकारी स्तर पर मुख्यमंत्री दाल-भात योजना जैसे प्रयास भी गरीब और जरूरतमंद लोगों को सस्ता भोजन उपलब्ध कराने के लिए चलाए जाते हैं। ऐसे में यह निजी ढाबा भी अपनी कम कीमत और देसी भोजन के कारण लोगों के बीच अलग पहचान बना रहा है।

हालांकि ढाबे की कीमतों, मेन्यू और वायरल दावों में स्थानीय स्तर पर अंतर हो सकता है। इसलिए वहां जाने वाले लोगों के लिए मौजूदा कीमत और उपलब्धता की पुष्टि मौके पर करना बेहतर रहेगा।

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