
जन एक्सप्रेस /देवाल :- पहाड़ की शांत वादियों में जब 16 वर्षीय प्रीति बिष्ट की सुरीली आवाज गूंजती है तो लोक संस्कृति के रंग और भी गहरे हो जाते हैं। चमोली जिले के सुदूरवर्ती देवाल क्षेत्र के (खेतामानमती गांव) की यह बेटी छोटी उम्र में ही लोक गायन के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना रही है। गढ़वाल से लेकर कुमाऊं तक विभिन्न स्थानीय मेलों में प्रीति अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों की खूब वाहवाही बटोर रही हैं।
गुरु ने पहचाना हुनर, बेटी की तरह दे रहे संगीत की शिक्षा
प्रीति को बचपन से ही संगीत के प्रति गहरा लगाव था। उनकी प्रतिभा को गुरु मुरली मनोहर उप्रेती ने पहचाना और उन्हें अपनी बेटी की तरह संगीत की बारीकियां सिखाकर आगे बढ़ने के लिए तैयार कर रहे हैं। गुरु के मार्गदर्शन और परिवार के प्रोत्साहन से प्रीति लगातार अपनी गायन प्रतिभा को निखार रही हैं। वर्तमान में वह अटल उत्कृष्ट इंटर कॉलेज देवाल में कक्षा 12वीं की छात्रा हैं।
मां ने दिया हौसला, पिता ने संभाला परिवार
प्रीति की इस संगीत यात्रा में उनकी मां बसंती बिष्ट की भूमिका भी अहम है। समाजसेवा से जुड़ी बसंती बिष्ट क्षेत्र की महिलाओं के अधिकारों और उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाती हैं। उन्होंने बेटी के संगीत के प्रति जुनून को हमेशा प्रोत्साहित किया। वहीं पिता दान सिंह बिष्ट देवाल में छोटी सी दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं।

गढ़वाल से कुमाऊं तक गूंज रही प्रीति की आवाज
प्रीति अब तक शेर सिंह दानू मेला लोहाजिंग, शहीद मेला सवाड़, देव सिंह दानू मेला घैस, डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती मेला देवाल समेत कुमाऊं के गागुंली डीडीहाट में आयोजित मेलों में अपनी प्रस्तुतियां दे चुकी हैं। इन मंचों पर उनके लोक गायन को खूब सराहना मिली और उन्हें सम्मानित भी किया गया।

लोक संस्कृति को बचाने की छोटी सी कोशिश
प्रीति के लिए लोक गायन केवल गीत गाने का माध्यम नहीं, बल्कि अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़े रहने का जरिया है। ग्रामीण परिवेश से निकलकर मंचों तक पहुंची यह किशोरी पारंपरिक लोकगीतों को अपनी आवाज देकर नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास कर रही है।






