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एक जमीन… कई जमानत! बाराबंकी में जमानत के खेल का खुलासा

री-वेरिफिकेशन में 43 मामलों ने खोली पोल चंद रुपयों के लालच में बन रहे जमानतदार

जन एक्सप्रेस/ बाराबंकी। गंभीर अपराधों में जेल भेजे गए आरोपियों को जमानत दिलाने के लिए इस्तेमाल होने वाले जमानतदारों को लेकर बाराबंकी पुलिस की री-वेरिफिकेशन जांच में चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। पुलिस जांच में ऐसे जमानतदारों की जानकारी सामने आई है, जिन्होंने कथित तौर पर अपनी जमीन के दस्तावेज अलग-अलग आरोपियों की जमानत में बार-बार इस्तेमाल किए। कुछ मामलों में पूछताछ के दौरान जमानतदारों ने आरोपी को जानने से भी इनकार कर दिया।पुलिस के मुताबिक, करीब दो महीने से चल रहे री-वेरिफिकेशन अभियान में 43 ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें जमानतदारों ने बाद में जमानत देने से इनकार कर दिया। जांच के दौरान पुलिस ऐसे लोगों की भूमिका भी खंगाल रही है, जो कथित तौर पर मामूली रकम या प्रलोभन के बदले जमानतदार बनने के लिए तैयार हो जाते थे।
एक जमीन के कागज, कई आरोपियों की जमानत
जमानत सेल के री-वेरिफिकेशन में असंद्रा के जमलापुर निवासी मो. वसीम से जुड़े गैंगस्टर एक्ट के मामले में पुलिस को ऐसा ही मामला मिला। कोर्ट से जमानत होने के बाद जमानतदारों का सत्यापन किया गया। रामसनेहीघाट के लम्बुआ उमरापुर निवासी रिक्शा चालक गंजन और श्रीधर से पूछताछ में सामने आया कि जिस जमीन के दस्तावेज जमानत में लगाए गए थे, उसी जमीन के आधार पर पहले भी तीन अन्य लोगों की जमानत कराई जा चुकी थी।पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान दोनों ने आरोपी को जानने से भी इनकार किया और उसके आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी होने से भी अनभिज्ञता जताई। इसके बाद दोनों ने जमानतदार बनने से इनकार कर दिया।
चोरी के आरोपी की जमानत में जमानतदार पर ही आठ मुकदमे
दूसरा मामला चोरी के आरोपी मनीष से जुड़ा बताया गया है। उसकी जमानत गांव के अंशू दीक्षित ने ली थी। सत्यापन के दौरान पुलिस को पता चला कि अंशू के खिलाफ चोरी के आठ मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस जांच में दोनों के बीच आपराधिक गतिविधियों से जुड़े होने की बात भी सामने आने की जानकारी दी गई है। इसके बाद अंशू ने भी जमानत देने से इनकार कर दिया।
प्रलोभन में लगाए दस्तावेज, बाद में जमानत से पीछे हटे
बरेली निवासी समीर शाह के मामले में भी जमानतदारों के सत्यापन के दौरान पुलिस को महत्वपूर्ण जानकारी मिली। जैदपुर के सेवकीपुरवा कोलागहबड़ी निवासी अनिल और दिनेश ने जमानत के लिए अपने दस्तावेज लगाए थे। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में दोनों ने प्रलोभन में आकर जमानत के लिए दस्तावेज लगाने की बात स्वीकार की। बाद में दोनों ने अपने अभिलेख वापस लेते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।
गंभीर अपराधों में जमानतदारों पर पुलिस की नजर
पुलिस के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों में फर्जी अभिलेख और कथित रूप से बार-बार जमानत लेने वाले पेशेवर जमानतदारों से जुड़े तीन मुकदमे कोतवाली नगर, देवा और जहांगीराबाद थानों में दर्ज किए जा चुके हैं।
अब पुलिस की निगाह विशेष रूप से गोहत्या, गैंगस्टर एक्ट, एनडीपीएस, लूट और पॉक्सो एक्ट जैसे गंभीर मामलों में जमानत देने वाले लोगों पर है। री-वेरिफिकेशन के दौरान ऐसे जमानतदारों की जानकारी जुटाई जा रही है, जिन्होंने लगातार अलग-अलग आरोपियों की जमानत में अपने दस्तावेज लगाए हैं।
जांच बढ़ी तो सामने आ सकता है बड़ा नेटवर्क
बाराबंकी में सामने आए इन मामलों ने जमानत प्रक्रिया में जमानतदारों के सत्यापन और दस्तावेजों के इस्तेमाल को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। पुलिस की जांच का फोकस अब ऐसे जमानतदारों और उन लोगों पर है, जो कथित तौर पर आर्थिक लाभ या प्रलोभन देकर लोगों से जमानत के दस्तावेज लगवाते हैं।सवाल सिर्फ यह नहीं कि आरोपी को जमानत कैसे मिली, बल्कि यह भी है कि उसकी जमानत की गारंटी देने वाला कौन था? एक ही जमीन के दस्तावेज कितने आरोपियों की जमानत में इस्तेमाल हुए और इसके पीछे कौन लोग सक्रिय थे? फिलहाल पुलिस री-वेरिफिकेशन के जरिए इन सवालों के जवाब तलाश रही है। जांच आगे बढ़ने पर इस कथित जमानत नेटवर्क से जुड़े अन्य नाम और मामले सामने आने की संभावना है।

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