
जन एक्सप्रेस /हरिद्वार :- देवभूमि स्थित देव संस्कृति विश्वविद्यालय में संस्कृत भाषा को व्यवहार और संवाद का हिस्सा बनाने के उद्देश्य से आयोजित दस दिवसीय संस्कृत संभाषण शिविर का आज समापन हो गया। समापन समारोह में विद्यार्थियों ने संस्कृत भाषा में विविध प्रस्तुतियों के माध्यम से इसकी महत्ता, उपयोगिता एवं सहज प्रयोग को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
अपने संदेश में देव संस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि संस्कृत भारतीय ज्ञान, संस्कृति और जीवन-दर्शन की मूल संवाहक भाषा है। इसे पुस्तकों और शास्त्रों तक सीमित रखने के बजाय दैनिक जीवन के संवाद में उतारना आवश्यक है। संस्कृत का सहज प्रयोग नई पीढ़ी को अपनी गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। उन्होंने कहा कि देव संस्कृति विश्वविद्यालय संस्कृत के संरक्षण, संवर्धन और इसके व्यावहारिक प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. गायत्री किशोर त्रिवेदी ने बताया कि श्रीजगद्देव संस्कृत महाविद्यालय के पूर्व साहित्याचार्य रामचंद्र गोविंद बैजपुरकर, उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के सहायक आचार्य डॉ. सर्वेश ओझा, संतोष कापडी आदि अतिथियों ने भी विद्यार्थियों को संस्कृत के नियमित अध्ययन के साथ दैनिक जीवन में अधिकाधिक प्रयोग के लिए प्रेरित किया। शिविर के दौरान विद्यार्थियों को संस्कृत में सहज संवाद, उच्चारण तथा व्यवहार में प्रयुक्त होने वाले वाक्यों का अभ्यास कराया गया। शिविर में देसंविवि के छात्र छात्राओं सहित अनेक लोगों ने प्रतिभाग किया।
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