नए कलेवर संग सियासी मैदान में उतरेगी कांग्रेस, पिछड़े और दलित वोट पर खास नजर, संगठन की बदलेगी तस्वीर

जन एक्सप्रेस। संतोष कुमार दीक्षित
राज्य मुख्यालय। साल 2027 में उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सभी दल तैयारियों में जुट गए हैं। भारतीय जनता पार्टी हो, समाजवादी पार्टी हो, बसपा या फिर कांग्रेस सभी दल अपने-अपने संगठनात्मक ढांचे में बदलाव करने में की कोशिश में हैं। भाजपा ने तो जिलाध्यक्ष की नियुक्त शुरू कर दी है और जल्द ही प्रदेश अध्यक्ष के चयन की तैयारी है। वहीं कांग्रेस भी अपने संगठनात्मक ढांचे में पांच स्तरीय बदलाव करने जा रही है। खास बात ये है कि भाजपा, कांग्रेस हो या अन्य दल सभी का फोकस दलित और पिछड़ा वर्ग के वोटों को अपने पक्ष में करने को लेकर है। कांग्रेस विभिन्न पदों पर नियुक्ति से लेकर प्रदेश इकाई की तस्वीर बदलने को लेकर मंथन कर रही है। जल्द ही प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस के तेवर बदले-बदले नजर आएंगे।
प्रदेश इकाई की बदलेगी सूरत
यूपी की सत्ता से लंबे अरसे से दूर रही कांग्रेस ने इस बार के आम चुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया । जिसकी वजह से पार्टी के हौंसले बुलंद। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को उम्मीद है कि प्रदेश स्तर की इकाइयों में बदलाव करके यूपी की राजनीति में फिर से एंट्री की जा सकती है। इसलिए पार्टी अपने संगठनात्मक ढ़ांच में पिछड़ा और दलित वर्ग के कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देकर अपने पक्ष में अधिक से अधिक वोटरों को करना चाहती है।

दावेदारों से की बात, लोगों का टटोला मन
कांग्रेस प्रदेश के सभी 75 जिलों में संगठन की मजबूती के लिए काम कर रही है। बूथ से लेकर मंडल, शहर, जिला प्रदेश स्तर तक पार्टी बदलाव करके सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय एवं प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडेय अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ छह जोन में सभी जिलों की अलग-अलग बैठक कर चुके हैं। इस दौरान जिलाध्यक्ष सहित अन्य पदों के दावेदारों से भी बातचीत हुई है।
कांग्रेस संगठन में 70 फीसदी पिछड़े-दलितों को तव्वजो
कांग्रेस संगठनात्मक ढांचे में पिछड़ों और दलितों पर फोकस कर रही। वहीं पार्टी संगठन में पद की प्राथमिकता में ऐसे दलित-पिछड़े नेताओं को अधिक तव्वजो दी जाएगी जो अधिक सक्रिय हो। सूत्रों की माने तो संगठन में करीब 70 प्रतिशत दलित और पिछड़े वर्ग के लोगों को शामिल किए जाने की योजना है।
बता दें कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस 17 सीटों पर लड़ी थी, जिसमें से छह सीटों पर जीत दर्ज की थी। इनमें से 10 सीटें ऐसी थीं जहां पार्टी नंबर दो पर रही थी। कांग्रेस की कोशिश है कि वह फिर से सत्तासीन हो सके। कांग्रेस ने संगठन सृजन के काम को अंजाम देने के लिए एक समिति का गठन किया है। जो विभिन्न स्तरों पर पदाधिकारियों की नियुक्ति को लेकर मंथन कर रही है। इस समिति में सलमान खुर्शीद, राज बब्बर, बृजलाल खाबरी जैसे पूर्व प्रदेश अध्यक्षों के साथ अमेठी सांसद किशोरी लाल शर्मा, पूर्व सांसद पीएल पुनिया, कांग्रेस नेता आराधना मिश्रा जैसे नाम शामिल हैं।
बसपा से छिटके वोटरों पर नजरें
प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी का ग्राफ लगातार नीचे गिर रहा है, ऐसे में सभी राजनीतिक दल इस खास वर्ग के लोगों को अपने पक्ष में करने की जुगत में है। कांग्रेस नेतृत्व भी दलित और पिछड़ों की बात करता है। उनके हक की बात करता है। जातीय जनगणना के आधार पर भागीदारी की बात करता है। जनहित के मुद्दों को लेकर संघर्ष को प्राथमिकता बताता है। कहीं न कहीं कांग्रेस अपने पुराने दिन वापस लाने की नीवं रखने की कोशिश में है।
सपा भी पीडीए फॉर्मूले से साध रही
लोकसभा चुनाव में अब तक का सर्वेश्रेष्ठ प्रदर्शन करने से गदगद प्रदेश की मुख्य विपक्षी समाजवादी पार्टी पीडीए फॉर्मूले को और मजबूत करना चाहती है। पूर्व मुख्यमंत्री और सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी पीडीए के मुद्दे को जोर-शोर से उठाकर इस खास वर्ग में पेंठ बनाने की कोशिश में जुटे हैं। नेता से लेकर कार्यकर्ता तक जहां भी जाते हैं पीडीए की बात करते हैं। उनके न्याय के लिए आवाज उठाते हैं। सपा की राजनीतिक मंशा फिर से सत्ता को हासिल करना है।
संविधान गौरव अभियान से दलित वोटों पर को साधने में जुटी भाजपा
यूपी की सत्ता का सुख भोग रही भाजपा भी प्रदेश में संगठनात्मक बदलाव कर रही है। ताकि 2027 में जीत की हैट्रिक लगाई जा सके। पार्टी संविधान गौरव अभियान के जरिए कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों को घेरने की कोशिश कर रही है। दलित और पिछड़ों के बीच जाकर खुद को दलित हितैषी बनाने के कार्य में जुटी है।






