
जन एक्सप्रेस / हरिद्वार: वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के जन्मशताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार के मार्गदर्शन में देशभर में पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक जागरूकता से जुड़े विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। इसी क्रम में महाराष्ट्र के पंढरपुर धाम में ‘हर घर तुलसी, हर हृदय संस्कार’ अभियान के अंतर्गत 11,111 तुलसी पौधों के वितरण का भव्य आयोजन किया गया।
यह महाअभियान जन्मशताब्दी समारोह के दलनायक एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या के निर्देशन में आयोजित किया गया। अभियान का उद्देश्य केवल तुलसी के पौधों का वितरण नहीं, बल्कि प्रत्येक परिवार तक स्वास्थ्य, आध्यात्मिकता, पर्यावरण संरक्षण और भारतीय संस्कारों का संदेश पहुंचाना है।
डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण मानव समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। इसी लक्ष्य को लेकर देश-विदेश में गायत्री परिवार के कार्यकर्ता सामुदायिक स्थलों, विद्यालयों, सार्वजनिक स्थानों और सड़कों के किनारे बड़े पैमाने पर पौधारोपण अभियान चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंढरपुर का यह तुलसी महाअभियान पर्यावरण संवर्धन के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों के संरक्षण का भी प्रभावी माध्यम है।
उन्होंने बताया कि भारतीय परंपरा में तुलसी को पवित्रता, आरोग्य, सात्विकता और देवत्व का प्रतीक माना जाता है। प्रत्येक घर में तुलसी का पौधा स्थापित कर स्वस्थ जीवनशैली, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और आध्यात्मिक चेतना को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि जन्मशताब्दी वर्ष के अंतर्गत ‘तरु पुत्र-तरु मित्र अभियान’, ‘वृक्षगंगा अभियान’, श्रीराम एवं माता भगवती स्मृति उपवन, नदी स्वच्छता अभियान, पर्वतीय क्षेत्रों में वृक्षारोपण तथा जलवायु संतुलन के लिए जनजागरण कार्यक्रम निरंतर संचालित किए जा रहे हैं। इन अभियानों के माध्यम से समाज के प्रत्येक वर्ग को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित नागरिकों को युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा रचित साहित्य भी भेंट किया गया। मुंबई दिया ग्रुप, महिला मंडल तथा गायत्री परिवार के अनेक स्वयंसेवकों ने कई दिनों तक निरंतर परिश्रम कर इस महाअभियान को सफल बनाया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों ने तुलसी के पौधे ग्रहण कर उन्हें अपने घरों में लगाने और उनकी नियमित देखभाल करने का संकल्प लिया।
यह अभियान पर्यावरण संरक्षण, भारतीय संस्कृति के संवर्धन और सामाजिक जागरूकता का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है।






