
रिपोर्ट पंकज पाण्डेय
जन एक्सप्रेस /पिथौरागढ़ :- विकासखंड बिण के ग्राम घुनसेरा की रेखा भट्ट आज महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़कर उन्होंने न केवल अपनी आजीविका को मजबूत किया, बल्कि सैकड़ों ग्रामीण महिलाओं के लिए भी स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की राह तैयार की है।रेखा भट्ट वर्तमान में एनआरएलएम से जुड़ी हैं और हरु सैम देवता स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष हैं। समूह के माध्यम से उन्हें सीआईएफ के तहत 75 हजार रुपये, सीसीएल के तहत दो लाख रुपये और आरएफ के रूप में 25 हजार रुपये की वित्तीय सहायता मिली। इस आर्थिक सहयोग का सदुपयोग करते हुए उन्होंने अपनी आजीविका गतिविधियों को विस्तार दिया और स्वयं सहायता समूह को भी मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई।महिला सशक्तिकरण और आजीविका के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय कार्यों को देखते हुए उन्हें वर्ष 2025 में तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके परिश्रम, नेतृत्व क्षमता और ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के प्रयासों की पहचान बना।

‘सरस’ केंद्र से पहाड़ के उत्पादों को मिल रहा बाजार
रेखा भट्ट वर्तमान में एनआरएलएम के ‘सरस’ केंद्र का संचालन कर रही हैं। इस केंद्र से जनपद के करीब 5,000 स्वयं सहायता समूह जुड़े हुए हैं। इन समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार किए जाने वाले स्थानीय और पहाड़ी उत्पादों को ‘सरस’ केंद्र के माध्यम से बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है।

केंद्र में ग्रीन टी, हर्बल टी, बेरीनाग टी, मंडुवे के बिस्किट, मंडुवे का आटा, मक्के का आटा, पहाड़ी राजमा, विभिन्न प्रकार की पहाड़ी दालें, पहाड़ी शहद और पहाड़ी घी समेत अनेक स्थानीय उत्पाद बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। इससे ग्रामीण महिलाओं को अपने उत्पाद बेचने के लिए बेहतर बाजार मिल रहा है और उनकी आय के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।
रेखा भट्ट का सफर यह साबित करता है कि यदि स्वयं सहायता समूहों को सरकारी योजनाओं, वित्तीय सहायता और बाजार की सुविधा मिले तो ग्रामीण महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ दूसरों के लिए भी रोजगार और आत्मनिर्भरता का माध्यम बन सकती हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। रेखा भट्ट की सफलता इसी अभियान की एक प्रेरणादायक तस्वीर है, जिन्होंने खुद आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ पहाड़ की अनेक महिलाओं के उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी संभाली है।






