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एआरटीओ कार्यालय गेट पर पांच डंफर खड़े कर लगाया जाम , 50 हजार की कथित घूस के लिए रजिस्ट्रेशन रोकने का आरोप

जौनपुर संवाददाता :- मनोज उपाध्याय 

जन एक्सप्रेस/जौनपुर :-  एआरटीओ कार्यालय में कथित रिश्वतखोरी का आरोप लगाते हुए शुक्रवार को वाहन मालिक ने अपने पांच डंफर कार्यालय के मुख्य गेट के सामने खड़े कर दिए। सड़क पर एक साथ भारी वाहनों के खड़े होने से जाम की स्थिति बन गई। वाहन मालिक ने रजिस्ट्रेशन बाबू पर 50 हजार रुपये की कथित रिश्वत मांगने और रुपये नहीं देने पर पिछले एक सप्ताह से पांचों वाहनों का रजिस्ट्रेशन लटकाने का आरोप लगाया।मड़ियाहूं निवासी वाहन मालिक विनय सिंह का कहना है कि उसने अपने पांच डंफरों के रजिस्ट्रेशन के लिए नियमानुसार आवेदन करने के साथ सभी जरूरी दस्तावेज कार्यालय में जमा कर दिए थे। आरोप है कि दस्तावेज पूरे होने के बावजूद करीब एक सप्ताह तक रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई गई। वाहन मालिक के मुताबिक, कार्यालय में तैनात रजिस्ट्रेशन बाबू गणेशदत्त द्वारा काम आगे बढ़ाने के लिए 50 हजार रुपये की मांग की जा रही थी। रिश्वत देने से इनकार करने के बाद फाइल को कथित तौर पर लगातार टाला जाता रहा।

पांच डंफर खड़े होने से मचा हड़कंप
रजिस्ट्रेशन में देरी से नाराज वाहन मालिक शुक्रवार को अपने पांचों डंफर लेकर एआरटीओ कार्यालय पहुंच गया और उन्हें गेट के सामने खड़ा कर दिया। भारी वाहनों के सड़क पर खड़े होते ही यातायात प्रभावित हुआ और मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। कार्यालय में भी मामले को लेकर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।मामले की खास बात यह रही कि जिस रजिस्ट्रेशन बाबू गणेशदत्त पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया, वह कार्यालय में मौजूद नहीं थे। एआरटीओ भी मौके पर नहीं मिले। ऐसे में आरोपों पर तत्काल विभागीय पक्ष स्पष्ट नहीं हो सका।

आरआई बोले- बाबू हाईकोर्ट, एआरटीओ लखनऊ गए
मामले में आरआई से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि संबंधित बाबू गणेशदत्त हाईकोर्ट गए हैं, जबकि एआरटीओ लखनऊ गए हुए हैं। रिश्वत मांगने के आरोपों की सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।दूसरे बाबू को सौंपी गई फाइलमामला बढ़ने के बाद विभागीय अधिकारियों ने वाहन मालिक की रजिस्ट्रेशन संबंधी फाइल दूसरे बाबू को सौंप दी। इसके बाद रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की कवायद शुरू हुई। अब सवाल यह है कि दस्तावेज पूरे होने के बावजूद फाइल एक सप्ताह तक क्यों लंबित रही और 50 हजार रुपये की कथित रिश्वत मांगने के आरोपों की जांच कब और किस स्तर से होगी

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