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श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट में CEO नियुक्ति का विरोध, आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण ने उठाए सवाल

जन एक्सप्रेस /अयोध्या :- श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू होते ही इसका विरोध भी सामने आने लगा है। ट्रस्ट द्वारा सोमवार को अपने आधिकारिक एक्स (X) हैंडल पर CEO पद के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए। बताया जा रहा है कि इस पद के लिए कुछ आवेदन भी प्राप्त हुए हैं, लेकिन संत समाज के एक वर्ग ने इस पहल पर आपत्ति जताई है।

अयोध्या की सिद्ध पीठ हनुमत निवास के पीठाधीश्वर और प्रख्यात आध्यात्मिक गुरु आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण ने राम कथा के दौरान CEO नियुक्ति का विरोध करते हुए कहा कि सरकार और ट्रस्ट दोनों को इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए।

‘राम मंदिर कोई सरकारी प्रतिष्ठान या कॉरपोरेट कार्यालय नहीं’

आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट कोई सरकारी संस्थान या कॉरपोरेट कार्यालय नहीं है, इसलिए यहां किसी अधिकारी को CEO नियुक्त करना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इस तरह का कदम मंदिर के मूल स्वरूप और परंपराओं के अनुरूप नहीं है।

प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से की अपील

आचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील करते हुए कहा कि राम मंदिर को सरकारी प्रतिष्ठान बनने से बचाया जाए। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यकता हो तो ट्रस्ट का पुनर्गठन या विस्तार किया जाए, उसमें योग्य लोगों को शामिल किया जाए, लेकिन उसका सरकारीकरण न किया जाए।

‘ट्रस्ट सत्ता का उपनिवेश नहीं बनना चाहिए’

उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सत्ता का उपनिवेश नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके अनुसार ट्रस्ट का नेतृत्व संत समाज के हाथों में रहना चाहिए और उसमें नौकरशाही या सरकारी अधिकारियों की नियुक्ति उचित नहीं होगी।

आचार्य ने कहा कि यदि अयोध्या में प्रशासनिक ढांचे और कॉरपोरेट मॉडल को बढ़ावा दिया गया तो राम जन्मभूमि की मूल आध्यात्मिक पहचान प्रभावित हो सकती है।

पहले भी उठा चुके हैं सांस्कृतिक पहचान का मुद्दा

आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण इससे पहले भी अयोध्या के विकास मॉडल को लेकर अपनी चिंता जता चुके हैं। उन्होंने कहा था कि विकास के नाम पर अयोध्या की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा था कि अब लोग गोवा की बजाय हनीमून मनाने के लिए अयोध्या आने लगे हैं, जो शहर की मूल पहचान पर सवाल खड़े करता है।

CEO नियुक्ति पर बढ़ सकती है बहस

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में CEO नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू होने के बाद अब इस मुद्दे पर धार्मिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा तेज होने की संभावना है। आने वाले दिनों में ट्रस्ट की ओर से इस विषय पर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

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